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सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) प्रक्रिया

सतत तथा व्यापक मूल्यांकन (Continuous and comprehensive evaluation) प्रक्रिया

आधार रेखा मूल्यांकन एवं पदस्थापन की प्रक्रिया:

किसी कक्षा में नामांकित सभी बच्चों का स्तर शैक्षिक दृष्टि से भिन्न-भिन्न होता है। स्तर की इसी भिन्नता को आकलन टूल की सहायता से जानना आवश्यक है। इस आकलन की प्रक्रिया से बच्चों का अधिगम स्तर एवं कक्षा स्तर का निर्धारण होता है जिससे प्रत्येक बच्चे के साथ उसके कक्षा एवं अधिगम स्तर के अनुसार कार्य आरम्भ कर सम्बन्धित टर्म/सत्र के अधिगम उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके यथा कक्षा 5 में नामांकित बच्चों का स्तर यदि न्यून पाया जाता है तो उन बच्चों के साथ अतिरिक्त कार्य करते हुए आर.टी.ई. की धारा 24 ( 1) (घ) के अनुसार शिक्षक न्यून स्तर वाले बच्चों को कक्षा स्तर तक लाएं एवं आगामी कार्य करवाते हुए स्तर में सुधार करें। यह कार्य प्रत्येक शिक्षक (जो कक्षा 1 से 5 मे पढ़ाता है) को करना है जिसमें हिन्दी, अंग्रेजी व गणित के बुनियादी कौशलों (भाषा में पढ़ना और लिखना तथा गणित में संख्या ज्ञान संक्रियाओं) को ध्यान में रखते हुए न्यून स्तर वाले बच्चों के साथ स्तर उन्नयन हेतु सतत् रूप से शिक्षण कार्य करते हुए सुधार के प्रयास आवश्यक है। आधार रेखा मूल्यांकन/पदस्थापन हेतु विद्यालय पुनः खुलने के प्रथम पखवाड़े में बच्चों के साथ पूर्व की कक्षा के कार्यों का दोहरान कार्य करवाने के पश्चात एक व्यापक कार्य पत्रक/प्रश्न -पत्र (प्लेसमेन्ट टूल) द्वारा बच्चों का आकलन किया जाना है। इस आकलन के आधार पर बच्चों को दो समूह निर्धारित किये जाने हैं, समूह-1 में वे बच्चे जो कक्षा स्तर के अनुरूप दक्षता रखते हैं और समूह-2 में वे बच्चे जो कक्षा स्तर से न्यून दक्षता वाले हैं। यहाँ शिक्षक के लिए यह आवश्यक हो जाता है वह बालकेन्द्रित शिक्षण करते हुए गतिविधि आधारित शिक्षण द्वारा समूह-2 के बच्चों के साथ अतिरिक्त कार्य करते हुए समूह-1 में लाने का अधिकतम प्रयास करें। पूर्व के वर्षों में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का आधार रेखा मूल्यांकन किया जाता था जबकि पूर्व प्रवेशित विद्यार्थियों का पूर्व की कक्षा के सतत् आकलन के आधार पर आकलन किया जाता रहा है। सत्र 2020-21 में कोविड-19 के प्रभाव के कारण विद्यालयों में विद्यार्थी लम्बे समय से नहीं आने के कारण सीखने-सिखाने की प्रक्रिया बाधित हुई है। अतः ऐसे में Summer Loss के कारण विद्यार्थियों के लर्निंग गैप को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रारम्भ होने के समय अध्ययनरत समस्त विद्यार्थियों का आधार रेखा आकलन प्रपत्र तैयार करते हुए मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है।

उक्त आधार रेखा आकलन प्रपत्र की जाँच कर उसे विद्यार्थी के पोर्टफोलियो में आवश्यक रूप से संधारित किया जाना है। आधार रेखा मूल्यांकन करने के पश्चात शिक्षक द्वारा उनके साथ सतत् रूप से कार्य करते हुए निश्चित समयान्तराल पर पदस्थापन द्वारा बच्चे की स्थिति / स्तर का आकलन किया जावें। इसकी जानकारी समय-समय पर अभिभावक को अनिवार्य रूप से दी जावे इस हेतु आकलन कार्य पत्रकों को भली भाँति जाँचकर, अशुद्धियों को रेखांकित/गोला करके, त्रुटि सुधार करवाते हुए अभिभावकों के हस्ताक्षर हेतु बच्चे के साथ घर भेजा जाना चाहिए। आगामी कार्यदिवस में बच्चों से प्राप्त कार्य पत्रकों को एकत्र करते हुए पोर्टफोलियो में संधारित करते हुए निर्धारित दस्तावेजों में दर्ज किया जावें।

किसी कक्षा में नामांकित बच्चों का कक्षा स्तर व कक्षा स्तर से न्यून की स्थिति का संधारण अध्यापक द्वारा योजना प्रारूप/डायरी और कक्षावार टर्मवार आकलन अंकन पुस्तिका (चैकलिस्ट) में विषयवार किया जाना है। इसी प्रकार प्रत्येक योगात्मक आकलन पश्चात भी पदस्थापन करते हुए संधारित किया जाना है आधार रेखा मूल्यांकन/पदस्थापन, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय योगात्मक मूल्यांकन / आकलन के पदस्थापन की प्रविष्टियां वार्षिक आकलन अभिलेख पंजिका में निर्देशानुसार (प्रथम पृष्ठ पर) संधारित की जानी है ।

एक अकादमिक (शैक्षिक) सत्र के लिए योजना एवं आकलन की संरचना:

प्रत्येक कक्षा एवं विषय के अधिगम उद्देश्यों को व्यवस्थित करते हुए शिक्षण-सत्र को तीन टर्म में विभाजित किया गया है। प्रत्येक टर्म के लिए आर.एस.सी.ई.आर.टी. उदयपुर द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम एवं सीखने के प्रतिफल (Leaming Outcomes) के अनुसार शिक्षण योजना का नियोजन करते हुए कक्षा-कक्षीय शिक्षण प्रक्रिया में योजनानुसार कार्य करवाया जाना है। टर्म के दौरान सतत् रचनात्मक अभ्यास कार्य बच्चों से साप्ताहिक  और पाक्षिक कार्य पत्रकों पर करवाया जाए।

कार्य पत्रकों को भली भांति जाँच करते हुए अशुद्धियों को रेखांकित/ गोला कर शुद्ध करवाया जाए जाँच किए गये कार्यपत्रक अभिभावकों से साझा करते हुए पोर्टफोलियो फाइल में संधारित किए जाएं।

सतत् शिक्षण आकलन योजना कार्य:

शिक्षण एवं आकलन योजना निर्माण (प्रारूप-शिक्षण आकलन योजना के अनुसार) के समय विद्यार्थियों के समूह/शैक्षिक स्तर को ध्यान में रखते हुए योजना का नियोजन किया जाना है। योजना निर्माण करते समय संपूर्ण कक्षा, समूह-1 व समूह-2 के लिए पृथक-पृथक शिक्षण की गतिविधियों का उल्लेख प्रारूप में निर्धारित स्थान पर आवश्यक रूप से किया जाये समूह-1 के लिए क्षमता संवर्धन योजना भी स्पष्ट रूप से बनाई जानी है।

रचनात्मक आकलन हेतु व्यापक/समग्र कार्यपत्रक / टूल-

किसी कौशल / पाठ, सूचक/ अवधारणा एवं उप अवधारणा के शिक्षण पश्चात अपेक्षित उद्दश्यों के सापेक्ष स्थिति आकलन एवं आगामी योजना हेतु पृष्ठपोषण (feedback) प्राप्त करने के लिए समग्र उद्देश्यों पर आधारित कार्य पत्रक तैयार किया जाना है।

योगात्मक आकलन-

पाठ्यक्रमणीय उद्देश्यों में मूल्यांकन के विविध टूल्स एवं उपलब्धि स्तर के परीक्षणों का उपयोग करते हुए निश्चित अवधि के अन्त में संबंधित अधिगम उद्देश्यों के सापेक्ष उपलब्धि स्तर के मूल्यांकन को योगात्मक आकलन के रूप में देखा गया है। योगात्मक आकलन दर्ज करने हेतु रचनात्मक आकलन, नोटबुक, पोर्टफोलियो, योगात्मक आकलन टेस्ट का सामूहिक रूप से आकलन कर उसके पश्चात् योगात्मक आकलन चैकलिस्ट में संबंधित अधिगम उद्देश्यों के सापेक्ष आकलन दर्ज करना है अतः यह ध्यान रखा जाए कि योगात्मक आकलन दर्ज करने का आधार मात्र योगात्मक आकलन टेस्ट ही नहीं माना जाएं। निदेशालय स्तर से जारी शिविरा पंचाग में योगात्मक मूल्यांकन की तिथियों का निर्धारण किया गया है।

कक्षा 5 के लिए प्राथमिक शिक्षा अधिगम स्तर मूल्यांकन एवं कक्षा 8 हेतु आयोजित प्रारंभिक शिक्षा पूर्णता प्रमाण-पत्र परीक्षा:- इस हेतु आरएससीईआरटी, उदयपुर, पंजीयक शिक्षा विभागीय परीक्षाएं एवं इस कार्यालय से जारी निर्देशों की पालना सुनिश्चित करते हुए टर्म विभाजन के अनुरूप शिक्षण कार्य सुनिश्चित किया जाए।

शिक्षकों की भूमिका

  • प्रथमतः शिक्षक बालक-बालिकाओं का निर्धारित समय पर आधार रेखा मूल्यांकन/ पदस्थापन कर योजना प्रारूप, चैकलिस्ट तथा वार्षिक आकलन अभिलेख पंजिका में यथास्थान दर्ज करें।
  • प्रत्येक कक्षा में विद्यार्थियों के कक्षावार एवं विषयवार पदस्थापन के आधार पर अध्यापक योजना डायरी प्रारूप-शिक्षण आकलन योजना के अनुसार) में योजना बनाकर बच्चों के साथ कार्य करें एवं समय-समय पर आकलन द्वारा यह सुनिश्चित करें कि बच्चों के स्तर में सुधार हो रहा है। साथ ही कक्षा शिक्षण के दौरान पीयर ग्रुप/व्यक्तिगत शिक्षण को भी सुनिश्चित करे।
  • शिक्षक द्वारा बच्चों का मूल्यांकन व्यक्तिगत और सामूहिक कार्यक्षेत्र में किया जाना है। मूल्यांकन के कुछ आयाम समूह में विशेष तौर पर देखे जा सकते है, जैसे-समूह भावना, सहयोग लेने एवं देने का कौशल, न्याय एवं समता के प्रति दृष्टिकोण, नेतृत्व का गुण, एक दूसरे के कार्यों का सम्मान और गुणों की प्रशंसा करना इत्यादि।
  • शिक्षक यह देखें कि जो विषय वस्तु बच्चे को सीखनी थी वो सीखी या नहीं। इस हेतु टर्मवार निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर बच्चे की प्रगति का मूल्यांकन / आकलन बच्चे के कक्षा कार्य, गृहकार्य, अभ्यास पत्रक, समूह पत्रक पर किये गये कार्य व गतिविधियों के दौरान किये गये कार्य पत्रकों पर गुणात्मक व सकारात्मक टिप्पणियों से किया जाना है एवं पोर्टफोलियो में संधारित किये जाने है ।
  • शिक्षक, क्षमता संवर्धन हेतु आयोजित कार्यक्रमों/प्रशिक्षणों (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में आवश्यक रूप से भाग लेगें। शिक्षक अपने विषय से संबंधित दस्तावेज (अध्यापक योजना डायरी, पाठ्यक्रम, चैकलिस्ट, वार्षिक अभिलेख पंजिका, पोर्टफोलियो आदि) प्रशिक्षण के दौरान साथ रखेगें। साथ ही शिक्षक अपनी शिक्षण प्रक्रिया संबंधी समस्या को अपनी अनुभव डायरी अथवा नोटबुक में दर्ज करें और संस्थाप्रधान द्वारा अग्रेषित करवाते हुए पीईईओं विद्यालय के संस्थाप्रधान एवं दक्ष प्रशिक्षक माध्यम से उच्च स्तर पर भिजवाएं। क्षमता सवंर्धन हेतु आयोजित कार्यक्रमों में शिक्षकों को शिक्षण कार्य में आ रही कठिनाइयों एवं चुनौतियों के निराकरण हेतु साथी शिक्षकों व दक्ष प्रशिक्षक से साझा करें क्षमता सर्वर्धन हेतु आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के पश्चात् अपना प्रतिवेदन निश्चित रूप से संस्था प्रधान को बैठक के आगामी दिवस में प्रस्तुत करें।
  • शिक्षक द्वारा योगात्मक मूल्यांकन (समेकित) पूर्ण करने के लिए प्रत्येक टर्म के दौरान सतत् रूप से रचनात्मक आकलन की चैक लिस्ट में निर्धारित सूचकों के सापेक्ष उपलब्धि अनुसार ग्रेड दर्ज किया जाना है (रचनात्मक आकलन- कक्षा-कक्षीय प्रक्रिया के दौरान सतत् रूप से किया जाने वाला कार्य है) । विद्यार्थी की प्रगति निर्धारित प्रपत्रों में संधारित की जानी है।
  • बच्चों के रचनात्मक/योगात्मक मूल्यांकन /आकलन के अंतर्गत निम्नांकित दस्तावेजों के आधार पर ग्रेड का निर्धारण करना है-
    (1) अध्यापक योजना प्रारूप/डायरी की समीक्षा और स्व-अनुभव
    (2) कक्षा कार्य
    (3) कार्य पत्रकों पर की गई टिप्पणी
    (4) गृहकार्य
    (5) पोर्टफोलियो
    (6) शिक्षक संवाद
    (7) अभिभावक संवाद
    (8) पेपर-पेंसिल टेस्ट
  • शैक्षिक सत्र के कक्षावार व विषयवार पाठ्यक्रम को तीन टर्म के आधार पर विभाजित किया गया है। जिसके अनुसार ही शिक्षक शिक्षण योजना एवं आकलन को नियोजित करें ।
  • शिक्षक शिक्षण कार्य के दौरान बच्चों के सुलेख, वर्तनी एवं उच्चारण के सुधार हेतु विद्यार्थियों को पर्याप्त अवसर प्रदान करते हुए नियमित रूप से जाँच करें।
  • सत्रारंभ से बच्चों के साथ कक्षा में स्तरानुसार ऐसी गतिविधियाँ आयोजित की जाएं जो समग्र विकास को सुनिश्चित करती हों। प्रत्येक विद्यालय में नियमित रूप से ऐसी गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जावें। जिसमें सभी बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित की जावें ।
  • कक्षा शिक्षण के दौरान विद्यार्थियों के सृजनात्मक कौशल को विकसित करने वाली गतिविधियों को आवश्यक रूप से करवाया जाएं यथा : किसी घटना या दृश्य से संबंधित चित्र बनाना, शब्दों से कहानी बनाना, चित्र से कहानी बनाना इत्यादि।
  • भाषा कौशल(Language Skill): इसके अंतर्गत बच्चों को विभिन्न भाषाओं के शब्दावली, शब्दकोष, लेखन से सबंधित कार्य करवाये जाने है तथा दैनिक समाचार पत्र वाचन प्रार्थना सभा में करवाया जाना चाहिए जिससे बच्चों में भाषा कौशल विकसित हो सके।
  • इस प्रकार की गतिविधियों के कार्यपत्रक भी पोर्टफोलियो में संधारित किए जाएं। इनमें से सर्वश्रेष्ठ का प्रदर्शन विद्यालय सूचना पट्ट या अन्य निर्धारित स्थान पर आवश्यक रूप से किया जाएं।

विद्यार्थियों में पढ़ने की प्रवृति (Reading Habits) विकसित करने के लिए पुस्तकालय, भाषा कौशल के लिए Vocabulary/शब्दावली, Dictionary/ शब्दकोष इत्यादि, अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने हेतु बालसभा व प्रभावी प्रार्थना सभा तथा सृजनात्मकता को बढ़ावा देने हेतु कार्यक्रमों का संचालन किया जाना सुनिश्चित करें साथ ही प्रभावी शिक्षण के साथ-साथ सृजनात्मक क्षमता विकसित करने हेतु विशेष कार्य करवाए।

संस्थाप्रधान की भूमिका :

  • संस्थाप्रधान कक्षा 1 से 5 के लिए शिक्षण प्रक्रिया के दौरान पीयर ग्रुप/व्यक्तिगत विषय शिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
  • संस्थाप्रधान यह सुनिश्चित करें कि सभी शिक्षकों द्वारा आधार रेखा /पदस्थापन का निर्धारण कर टर्मवार पाठ्यक्रम विभाजन के अनुसार अध्यापक योजना डायरी में शिक्षण आकलन योजना तैयार कर शिक्षण कार्य (कक्षा-कक्षीय प्रक्रिया) प्रारंभ कर दिया है तथा सतत् आकलन करते हुए चैकलिस्ट का संधारण कर रहे है।
  •  संस्थाप्रधान यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक शिक्षक के द्वारा कक्षा शिक्षण कार्य के दौरान बच्चों के सुलेख, वर्तनी व उच्चारण सुधार पर भी गंभीरता से कार्य किया जा रहा है तथा बच्चों के गृहकार्य की जाँच तथा सुधारात्मक कार्य नियमित रूप से किया जा रहा है । 7.4 7.4 विद्यार्थियों के लिए यह सुनिश्चित करें कि विद्यालय में विद्यार्थियों के उत्कृष्ट कार्य को प्रदर्शित करने हेतु स्थान निर्धारित कर दिया है।
  • संस्था प्रधान शिक्षकों के कार्यव्यवहार एवं शिक्षण की समीक्षा कर गुणात्मक सुधार हेतु मार्गदर्शन प्रदान करे।
  • संस्थाप्रधान शिक्षकों द्वारा क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों/ प्रशिक्षणों में भाग लेने के उपरान्त उनसे प्रतिवेदन प्राप्त कर संधारित करना सुनिश्चित करें। संस्थाप्रधान बिन्दु संख्या 7.1 से 7.6 के बिन्दुओं के अनुसार अवलोकन करते हुए पाक्षिक लिखित प्रतिवेदन दो प्रतियों में तैयार कर एक प्रति पीईईओ/सीबीईईओ को प्रेषित करें तथा द्वितीय प्रति विद्यालय में संधारित करेंगे।