राजस्थान सरकार कार्मिक (क-3/जांच) विभाग द्वारा अपने परिपत्र क्रमांक-.9(5)(30)कार्मिक / क-3/ जांच / 2004 पार्ट, दिनांक-20-09-2013 द्वारा किसी का कार्मिक द्वारा अपना पारिवारिक दावित्व निर्वहन न करने पर निम्न कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया हैः-

राज्य सरकार के ध्यान में आया है कि कई राजसेवक शराव पीने के आदी है एवं ऐसे राजसेवक अपने परिजन अर्थात् पत्नी, अवयस्क या विकलांग पुत्र / पुत्री एवं वृद्ध माता पिता के भरण पोषण हेतु अपने पारिवारिक दायी का सम्पूर्ण निर्वहन नहीं करते है।

इस सम्बन्ध में राजस्थान सिविल सेवाएं (आचरण)नियम 1971 के नियम – 4 उपनियम – VI में निम्न प्रकार का प्रावधान है:-

“Any government servant who without sufficient and reasonable cause, neglects or refuses to maintain his/her spouse, parents, minor or disabled child who is unable to maintain himself/herself or, docs not look after any of them in a responsible manner, shall be liable to disciplinary action.” 

इसी प्रकार नियम 26 के उपनियम (d) में यह भी प्रावधान किया गया है कि कोई राजसेवक मादक द्रव्य का अधिक उपयोग नहीं करेगा ।

उक्त प्रावधान होते हुए भी कई राजसेवकों की आचरण के सम्बन्ध में परिजनों से अथवा अन्य किसी विश्वसनीय सूत्र से सूचना प्राप्त होती है कि उक्त राजसोक्क शराब, नशीले पदार्थ या ड्रग्स लेने का आदी है. इस सम्बन्ध में राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि नियगानुसार जांच के पश्चात् राजसेवक के उक्तानुसार दोषी पाये जाने पर उसके मासिक वेतन का 50% पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन हेतु राजसेवक के परिजन (परिस्थिति अनुसार निर्धारण किया जायेगा) के बैंक खाते में सीधे ही स्थान्तरित कर दी जावे. शेष 50% राशि नियमानुसार कार्मिक के खाते में जमा की जावेगी।

अतः सभी आहरण वितरण अधिकारी एवं नियंत्रक अधिकारियों को यह निर्देश दिए जाते है कि उपरोक्तानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करावें ।

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