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Leave rules (अवकाश नियम)

Leave rules (अवकाश नियम)

>>  कर्तव्य सम्पादन ही अवकाश अर्जन का अधिकार देता है – आर. एस. आर. -57

>>  अवकाश प्राप्त करना अधिकार नही है एक कर्मचारी उसे देय अवकाश को अधिकार के रूप में नही मांग सकता अवकाश स्वीकृत करने वाला अधिकारी जन हित में आवेदित अवकाश को अस्वीकृत कर सकता है कम कर दे ,या स्वीकृत अवकाश को खण्डित कर दे । लेकिन वह अवकाश की प्रकृति को नहीं बदल सकता है । नियम- 59

>> उपयोग किये गये अवकाश की प्रकृति बदलने की कर्मचारी को सुविधा-90 दिन के अन्तर्गत कर्मचारी ऐसा प्रार्थना-पत्र दे सकता है ,अवकाश की प्रकृति बदलने पर वेतन वसूली योग्य बनता है तो वसूली की जायेगी । और वेतन देय बनता है तो भुगतान किया जायेगा ।

>> अवकाशो से पूर्व सार्वजनिक अवकाश पड़ने पर कर्मचारी उपभोग करेगा ।

>> अवकाश प्रार्थना-पत्र उसे प्रस्तुत किया जाये जो अवकाश में कमि या वृद्धि कर सकता हो । सक्षम अधिकार को प्रस्तुत करें । विद्यालय में कार्यरत कार्मिक संस्था प्रधान को अपना अवकाश प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करेंगें। संस्था प्रधान अपने से उच्च अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी महोदय को प्रस्तुत करेंगे । नियम- 67

>> राजपत्रित कर्मचारी के मामले में 60 दिन तक का अवकाश चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधार पर उससे अधिक का प्राधिकृत अधिकारी से उच्चतर अधिकारी या मुख्य चिकित्साधिकारी या समकक्ष से चिकित्सा प्रमाण पत्र पर प्रतिहस्ताक्षर करवाये गये हो और अवकाश की अनुशंषा की गयी हो इसके साथ जी0 ए045 संलग्न करना चाहिए । नियम -70

>> भर्ती के मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी/इकाई प्रभारी से प्रतिहस्ताक्षरित होना चाहिए । नियम 74

अराजपत्रित अधिकारी को अवकाश– 1.जहाँ एक प्राधिकृत चिकित्साधिकारी नही हाने पर रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टिशनर्स के प्रमाण पत्र के आधार पर अवकाश लिया जा सकता है वह मेडीकल काउन्सिलं ऑफ इडिया से पंजीकृत होना चाहिए ।

(अ) सक्षम प्राधिकारी एक दूसरे चिकित्साधिकारी से राय ले सकता हे ऐसे प्रकरण मुख्यसचिव / मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास प्रकरण भेजा जाना चाहिए

(ब)वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी की राय यथाशीघ्र प्राप्त की जानी चाहिए एवं पूर्व के उपचार निदान के बारे में बयौरा अंकित किया जाना चाहिए * होम्योपेथिक चिकित्सक का 15 दिन का प्रमाण – पत्र मान्य होगा । आदेश क्रमांक 16.10.89

>>चिकित्सा प्रमाण पत्र अवकाश प्राप्त करने का अधिकार पत्र नही है । नियम 79

>>15 दिन का चिकित्सा अवकाश बहिरंग रोगी को किसी भी चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिया जा सकता है।

>>15 से 30 दिन का वरिष्ठ अधिकारी दे सकता है इसमें मूल अवधि शामिल होगी ।

>> 30 से 45 दिन तक वरिष्ठ विशेषज्ञ एव तत् स्तर के अधिकारी ।

>> 45 दिन से अधिक दिन का अवकाश मेडिकल बोर्ड द्वारा दिया जा सकेगा । जिसमे मूल अवधि शामिल है ।

>> आयुर्वेद चिकित्सक 15 दिन का एवं बाद में 7-7 दिन का कुल 29 दिन तक का चिकित्सा अवकाश दे सकता है ।

>>29 से 45 दिन तक के लिए ‘अ ‘श्रेणी चिकित्सालय के वरिष्ठ विशेषज्ञ /जिला आयुर्वेद अधिकारी अवकाश दे सकता है ।

>> जहाँ आवश्यक हो महिला चिकित्सक की राय आवश्यक सदस्य के रूप में ली जानी चाहिए ।

>> आयुर्वेद के अन्तरंग रोगी के लिए 30 दिन से अधिक पर प्रभारी के प्रतिहस्ताक्षर होने चाहिए ।

>>चिकित्सा अवकाश उपभोग के बाद सेवा पर उपस्थिति के समय आरोग्य प्रमाण – पत्र दिया जाना चाहिए उसके बिना कार्य ग्रहण नही करवाये ।

>> बार बार चिकित्सा अवकाश लेने वाले कार्मिक के मामले में कि वह अनाधिकृत रूप से मेडिकल ले रहा है चिकित्सा बोर्ड से जॉच करवायी जा सकती है । ऐसा तत्काल किया जाना चाहिए।

>> एक राज्य कर्मचारी को 20 अर्द्धवेतन अवकाश कार्यग्रहण तिथि से एक वर्ष में जोड़े जायेंगे । उपभोग करने पर दोगुनी मात्रा में काटे जाएंगे ।

Leave rules (अवकाश नियम)आकस्मिक अवकाश

>> स्थायी राज्य कर्मचारी को एक वर्ष में 15 आकस्मिक अवकाश देय है ।

>> एक बार में 10 आकस्मिक अवकाश ले सकता है ।

>> आकस्मिक अवकाश को मान्यता नही है और किसी नियम के अधीन नही है

>>राज्य कर्मचारी को आधे दिन का आकस्मिक अवकाश भी दिया जा सकता है ।

>> तीन दिन तक लगातार 10 मिनिट विलम्ब से आने वाले कर्मचारी का 1 आकस्मिक अवकाश काटा जायेगा ।

>> अवकाश स्वीकृति से पूर्व मुख्यावास नही छोडना चाहिए । अवकाश प्रार्थना पत्र में अवकाश कालीन पता एवं मोबाइल नम्बर अनिवार्य रूप से लिखे । अवकाश पते में परिवर्तन की सूचना कार्यालयध्यक्ष को देनी चाहिए। नियम- 60

>> निष्कासित किये जाने वाले कर्मचारी का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाना चाहिए जिसे असामान्य व्यवहार/सामान्य अयोग्यता के आधार पर । नियम- 82 * निलम्बित कर्मचारी को किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नही किया जावे मुख्यावास छोडने की अनुमति मांगने पर दी जानी चाहिए ।

>> एक कर्मचारी अपने स्वीकृत अवकाश से पूर्व सेवा पर उपस्थित नही हो सकता जब तक अवकाश स्वीकृत करने वाला उसे सेवा पर उपस्थित होने का आदेश नही देता । नियम- 85

>> एक कर्मचारी बिना अवकाश स्वीकृति के अपने कर्तव्य से अनुपस्थित रहता हे तो उसे ” कर्तव्य से जान बूझकर अनुपस्थित रहा “मानकर ऐसी अनुपस्थिति को सेवा में “व्यकधान ” मानते हुए पिछली सेवाएँ जब्त की जा सकेगी तब तक जब तक अनुपस्थिति का सन्तोष जनक जबाब नही दिया जायेगा नियम 86 (1)

>> एक कर्मचारी जो अवकाश की समाप्ति के बाद या अवकाश वृद्धि को मना कर देने के बाद अपने कर्तव्य पर अनुपस्थित रहता है , तो अनुपस्थित माना जायेगा एवं इस अवधि का किसी प्रकार ओ वेतन आहरित नही किया जायेगा ऐसी अवधि को असाधारण अवकाश में परिवर्तित कर दिया जायेगा जब तक सन्तोष प्रद जवब नही दिया गया हो । एवं अवकाश स्वीकृत करने वाले प्राधिकारी द्वारा अवकाश स्वीकृत नही कर दिया जाता है नियम 86 (2 )

>> नियम 86 (1) नियम 86(2 ) के अन्तर्गत अनुशासनिक प्राधिकारी ऐसे राज्य कर्मचारी के विरूद्ध वर्गीकरण नियन्त्रण एवं अपील नियमो के अनुसार विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ कर सकता है जो अपने पद से एक माह से अधिक समय से स्वेच्छिक अनुपस्थित चल रहा है । ऐसा आरोप सिद्ध हाने पर सेवा से निष्कासित (रिमूब्ड) कर दिया जावे । विशेष परिस्थिति को छोड़कर राज्य सरकार एक कर्मचारी को 5 वर्ष से अधिक तक निरन्तर बिना अवकाश के अनुपस्थित रहता है तो वैदेशिक सेवा के अतिरिक्त तो सेवा से त्याग पत्र दिया हुआ माना जायेगा इस नियम को लागू करने से पूर्व कम्रचारी को उचित अवसर दिया जाना चाहिए की अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट कर सके ।

>> राजकीय निर्णय- कर्त्तव्य से स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थित पर कार्यवाही सेवा से स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थिति चाहे उस अवधि को अवकाश स्वीकृत कर आवृत नही कर दिया गया हो पदाधिकार को समाप्त नही करती । ऐसी अनुपस्थिति को सेवा अवधि को समस्त प्रयोजनो के लिए वार्षिक वेतन वृद्धि अवकाश एवं पेंशन आदि के लिए सेवा का शून्य काल माना जायेगा । केवल अकेली स्वेच्छा से अनुपस्थिति ही हो अवधि को पेंशन प्रयोजनों के लिए सेवा में व्यवधान (Interruption) माना जायेगा, तथा पूर्व की सेवा जब्त (forfeited) मानी जायेगी ।

स्वीकृत अवकाश से अधिक समय रूकने पर ( over stayal ) पर भी अनुशासनिक अधिकारी राजस्थान नागरिक सेवाएँ (वर्गीकरण , नियन्त्रण एवं अपील ) नियम 1958 के अनतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए ऐसे कर्मचारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही कर कोई शास्ति (दण्ड) आरोपित कर सकता है, चाहे ऐसी अवधि एक दि नही क्यो नही हो ।

नियम- 87 प्रत्येक राज्य कर्मचारी का अवकाश लेखा आर.एस.आर.सेवा नियम 160 (2) के अनुसार उस प्राधिकारी के पास होगा जिसको सेवा पुस्तिकाएँ अपनी सुरक्षा में रखने की जिम्मदारी दी गयी है । संस्था प्रधान के मामले में प्रभारी का नाम व मोबाइल नम्बर भी अनिवार्य रूप से लिखवाये । * बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने अन्त्येष्टि में जाने पर अवकाश की कार्योत्तर सवीकृति प्रदान की जा सकेगी ।

>> शिक्षको के लिए आकस्मिक अवकाश की गणना 1 जुलाई से 30 जून तक की जाती है, और मंत्रालयिक के लिए 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक ।

>> आकस्मिक अवकाश इस प्रकार नहीं दिया जाना चाहिए 1. वेतन एवं भत्ते की गणना 2. वेकेशन के कम में आकस्मिक अवकाश स्वीकृत नही किया जायेगा । नियम – 2 दिनांक 02.02.1971

>> मंत्रालयिक कर्मचारी को रविवार माह के द्वितीय शनिवार अथवा अन्य राजपत्रित अवकाशों में सक्षम अधिकारी द्वारा लिखित में अनिवार्यतः आदेशित करने पर की कर्मचारियो को राजकीय कार्य निपटाने हेत उपस्थित होने है के एवज में कार्य पर उपस्थित होने पर सी सी एल ( compensatory casual leave ) देय है । परन्तु उक्त आदेश दण्डादेश के रूप में नहीं होना चाहिए । उक्त क्षतिपूर्ति लिपिक वर्गीय चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों पर ही लागू होंगे यह आदेश अधिकारियों के निजी सहायक वर्गपर लागू नही होगा । जैसे आशुलिपिक गण न्यायालयों के वाचकगण रिडर आदि । उक्त निर्देश या अन्य छुट्टी के दिन उपस्थित होने के लिए किसी प्रकार का वाहन व्यय या अतिरिक्त वेतन स्वीकृत नही होगा । राजपत्रित अवकाश के दिन संग्राहल खुलने पर क्षतिपूर्ति अवकाश देय है । शिक्षा विभाग के आदेश दिनांक 4 मई 1979 के अनुसार संग्रहालयों में कार्यरत कर्मचारियों को भी अवकाश के दिनों में संग्रहालय खुले रहने की स्थिति में क्षति पूर्ति अवकाश देय होगा ।

राजपत्रित अवकाश के दिन पुस्तकालय खुलने पर क्षतिपूर्ति अवकाश देय है । शिक्षा विभाग के आदेश कमांक संख्या प. 11(14) शिक्षा 2 /73 दिनांक 16 जून 1977 के अनुसार समस्त विद्यालयों के पुस्तकालयाध्यक्षो को सार्वजनिक पुस्तकालयों में कार्यरत अराजपत्रित कर्मचारी मंत्रालयिक तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को द्वितीय शनिवार के एवज में एक दिन का क्षतिपूर्ति अवकाश दिया जा सकेगा । चौकीदार को क्षतिपूर्ति अवकाश- चौकीदारों को 15 दिन में 24 धण्टे का विश्राम देय है यदि उन्हे इस दिन भी बुलाया जाता है तो उसके एवज में क्षतिपूर्ति अवकाश देय होगा । अन्य अवकाश एवं रविवार के दिन कार्य की एवज में क्षतिपूर्ति अवकाश देय नही है । (राज्य सरकार के आदेश दिनांक 03.08.1977 के अनुसार )

>> दो कलेण्डर वर्ष का आकस्मिक अवकाश एक साथ ले सकेगें पर अवकाश की सीमा 10 से अधिक नहीं होगी आदेश दिनांक 2.4.1991

>> सेवाएँ 3 माह व कम होने पर 3 दिन

>>3 माह से अधिक सेवा पर 7 दिन

>> सेवानिवृति वर्ष में 1.1.2002 से प्रभावी

>>3 माह व कम 5 दिन

>>3 माह से अधिक 6 माह से कम 10 दिन

>>6 माह से अधिक 15 दिन

Leave rules (अवकाश नियम) परिवीक्षाधीन कर्मचारी को अवकाश

>> नव नियुक्त कर्मचारी को कार्य ग्रहण दिनांक से पूर्ण वर्ष पर 15 आकस्मिक अवकाश ही देय होंगे । कलेण्डर वर्ष की अपूर्णता की स्थिति में आनुपातिक आधार पर उसके द्वारा प्रतयेक पूर्ण माह की सेवा के एवज में सवा आकस्मिक अवकाश का लाभ देय होगा । अर्थात् एक माह की सवा वह भी माह की समाप्ति पर अन्यथा अवैतनिक होगा । परिवीक्षा अवधि समाप्ति पर स्थायी करण होने पर स्थायीकरण तिथि से नियमित राज्य कर्मचारी को देय अवकाश सुविधा मिलेगी ।

>> आर0 एस0 1951 के नियम 122 ( ए ) के अनुसार नियमित राजकीय सेवा में चल रहे परिवीक्षाधीन अवधि में अन्य किसी भी प्रकार का अवकाश अर्जित नही करेगा ।

>> शासन उपसचिव – प्रथम शिक्षा ग्रुप -2 विभाग के पत्रांक प. 17(2) शिक्षा -2 2008 दिनांक 18.10.12 द्वारा प्रदत मार्गदर्शनानुसार नवनियुक्त पपिवीक्षाधीन प्रशिक्षणार्थी जो पूत्र में राज्य कर्मचारी होने के कारण उनके अवकाश खाते में पूर्व अर्जित अवकाश स्वत्व बकाया हे तो पूर्व अर्जित अवकाश उपयोग की अनुमति दिए जाने का निर्णय सम्बन्धित नियन्त्राण अधिकारी द्वारा लिया जायेगा एवं ऐसे अवकाश की स्वीकृति नियन्त्राण अधिकारी द्वारा दिये जाने पर परिवीक्षा पर कोइ प्रभाव नही पडेगा ।

>>पी. एल. एवं एम. एल. 3 वर्ष तक देय नही है ।

>> परिवीक्षाधीन कर्मचारी किसी भी प्रकार का अवकाश अर्जन नही करेगा ।

>> परिवीक्षाधीन महिला कर्मचारी को नियम 103 व 104 के अन्तर्गत प्रसूति अवकाश देय है । >> पुरूष परिवीक्षाधीन कर्मचारी को पितृत्व अवकाश नियम 103 ए के अनतर्गत देय है ।

>> आर0 एस0 आर0 1951 के नियम 96 बी तहत तीन माह तक का असाधारण अवकाश अवैतनिक नियुक्त अधिकारी द्वारा छूट प्रदान की गयी थी ऐसे में परिवीक्षा की अवधि में बढोतरी नही होती

>> परन्तु वित विभाग की अधिसूचना क्रमांक – F.1(2 ) FDRULES06 PART – 1 DATE 11-06-14 एवं संशोधित अधिसूचना क्रमांक F.1(2)FDRULES06 PART -1 DATE 06-08-14 के द्वारा 30 दिन सीमित कर दिया गया है अब 30 दिन से अधिक का अवैतनिक अवकाश लेने पर जितने दिन अधिक अवकाश है उतने दिन परिवीक्षा अवधि बढ़ जायेगी।

>> 3 माह तक नियुक्ति अधिकारी एवं 1 साल तक प्रशासनिक विभाग देगा । अपवादिक एवं अपरिहार्य परिस्थितियों में एक वर्ष से अधिक का असाधारण अवकाश कार्मिक एवं वित विभाग की पूर्वानुमति से स्वीकृत किया जा सकेगा।

>> परिवीक्षा काल की अवधि नियमित नियुक्ति मानी जायेगी जो की पदोन्नति एवं ए0 सी0 पी0 में सेवा अवधि की गणना के लिए मान्य होगी कार्मिक विभाग की अधिसूचना कमांक – 6-7(2)DOP/a-ii/2005DATED26-04-2011

Leave rules (अवकाश नियम)विशिष्ट आकस्मिक अवकाश

>> बन्ध्याकरण के लिए पुरूष 6 दिन महिला को 14 दिन का विशिष्ट अवकाश देय है । यह अवकाश सी एल के साथ देय नही है । यह अवकाश लाल स्याही से सेवा पुस्तिका में लिखा जायेगा ।

>> उस पुरूष कर्मचारी को 7 दिन का विशिष्ट अवकाश देय है जिसने बन्ध्याकरण करवाया है ।

>> बन्ध्याकरण के असफल होने पर पुनः आपरेशन करवाने पर 6 दिन का चिकित्सक की राय के आधार पर देय होगा । जिस तरह पुरूष कर्मचारियों को उनकी पत्नी के बन्ध्याकरण ऑपरेशन करवाने पर 7 दिन का विशिष्ट आकस्मिक अवकाश देय है उसी तरह महिला राज्य कर्मचारियों को भी उनके पति के बन्ध्याकरण ऑपरेशन करवाने पर विशिष्ट आकस्मिक अवकाश दिया जाना चाहिए ।

>> निरोधावकाश-21 से 30 दिन तक का अवकाश परिवार में छूत रोग होने पर विशिष्ट आकस्मिक अवकाश मेडिकल के आधार पर देय है ।

>> स्वाईन फल्यू होने पर 7 दिन का विशिष्ट आकस्मिक अवकाश देय है ।

>> प्रसूति अवकाश नियम 103

>> प्रसूति अवकाश नियम 103 दो से कम उतरजीवी सन्तानोवाली किसी महिला कर्मचारी को प्रारम्भ की तारीख से 180 दिन का अवकाश देय है ।

>> दो बार उपभोग करने पर भी उतरजीवी सन्तान नही हो तो प्रसूति अवकाश एक बार और स्वीकृत किया जा सकता है ।

>> पहली बार में जुडवां सन्तान होने पर दो इकाई मानी जायेगी ।

>> पहली बार मे एक दुसरी बार में जुड़वां सन्तान होने पर एक इकाई मानी जायेगी । सेवा पुस्तिका में ऐसे अवकाश की अलग से प्रविष्टी की जायेगी ।

>> प्रसूति अवकाश गर्भपात एबोर्शन के व रक्तस्राव मामले में भी सवीकृत किया जा सकेगा जिसकी अवधि 6 सप्ताह या 42 दिन चिकित्सक प्रमाण- पत्र आवश्यक है ।

>> अधूरे गर्भपात के मामले में यह अवकाश देय नही है ।

>> बच्चा गोद लेने पर भी प्रसूति अवकाश देय है ।

>>180 दिन का प्रसूति अवकाश स्वीकृत करने में कार्यालयाध्यक्ष सक्षम है ।

>>अथायी/संविदा महिला कर्मचारी को भी प्रसूति अवकाश देय है ।

>> यह अवकाश अन्य अवकाशें के साथ भी लिया जा सकता है ।

>> कार्य ग्रहण करते समय आरोग्य प्रमाण पत्र देना होगा ।

Leave rules (अवकाश नियम)पितृत्व अवकाश – नियम 103 ए

दो उत्तरजीवी सन्तान तक दो बार पितृत्व अवकाश स्वीकृत होगा बच्चो के जन्म के 15 दिन पूर्व से 3 माह की अवधि में यह देय है ।

>>यह अवकाश सवैतनिक होगा यह अवकाश गर्भपात होने पर देय नही है ।

>> चिकित्सा अवकाश 3 साल पहले नही मिलेगी । अर्द्धवेतन अवकाश जोकि कार्मिक को नियक्ति तिथि से एक वर्ष में 20 देय है। यह कितने भी संचित किये जा सकते है ।

>> उपार्जित अवकाश -एक स्थायी राज्य कर्मचारी को वर्ष में 15 उपार्जित अवकाश देय है अवकाश कलेण्डर शिक्षको के लिए 1 जनवरी से 31 दिसम्बर है । प्रतिमाह की सेवा पर सेवा के हिसाब से ।

>> मंत्रालयिक कर्मचारी के लिए अवकाश एक जनवरी एवं एक जुलाई को 15 अग्रिम रूप से अवकाश लेखे में जोड़ा जायेगा नियम -91

>> लेखा मद मांग संख्या 15 लेखा मद 2071 पेंशन एवं सेवानिवृति हित लाभ 01 सिविल सेवा 115

Leave rules (अवकाश नियम)छुट्टी नकदीकरण हितलाभ

>> एक कर्मचारी अपने सम्पूर्ण सेवाकाल में 300 अवकाश तक जमा कर सकता है जिनका सेवानिवृति पर नकदीकरण किया जायेगा। एवं उस समय देय महेंगाई की दर पर स्वीकृत किया जायेगा नियम – 97

>>10 दिन के अवेतनिक अवकाश पर 1 उपार्जित अवकाश कम कर दिया जायेगा । जिसकी सीमा 15 से अधिक नही होगी

>> मंत्रालयिक कर्मचारी को 300 से अधिक उपार्जित अवकाश होने पर 6 माह की अवधि में अवकाश के रूप में उपभोग करने का अधिकार होगा उसके बाद स्वतः ही व्ययपगत मानी जायेगी ।

>> लेकिन 15 दिन का अवकाश नकदीकरण के समय 300 में से ही कम की जायेगी न की 300 से अधिक में से

>> प्रत्येक स्थायी राज्य कर्मचारी को 15 दिन का उपार्जित अवकाश प्रतिवर्ष नकदीकरण का लाभ देय है । सेवा पुस्तिका में लाल स्याही से इन्द्राज करे ।

>> शीतकालीन एवं मध्यावधि / ग्रीष्मावकाश में कार्य करने एवं प्रशिक्षण में भाग लेने के एवज में प्रति 3 दिवस पर एक दिन का उपार्जित अवकाश कर्मचारी के लेखे में जोडा जोयेगा परन्तु एक कलेण्डर वर्ष में 30 से अधिक अवकाश कदापि नही जोडे जाये । अवकाश का उपभोग करने पर एक दिन में एक कम किया जायेगा ।

>>120 दिन का उपार्जित अवकाश एक साथ लिया जा सकता है । 14 दिन पूर्व अनिवार्य रूप से स्वीकृत करवाना होता है । ऐसे अवकाश सेवा पुस्तिका में अवकाश लेखे में से व्ययपगत किये जायेंगे ।

>> टी बी/कैंसर/मानसिक रोग / के निदान के मामले में 180 दिन का उपार्जित अवकाश देय है ।

>> आर एस आर नियम 50 /53 के अनुसार अनिवार्य सेवनिवृति पर उपार्जित अवकाश देय है । बशर्ते किसी दण्ड स्वरूप न हो ।

>> अदेय अवकाश-सेवानिवृति से पूर्व अवकाश मामलों को छोड़कर स्वीकृत किया जा सकता हे । अर्द्ध वेतन अर्जित कर सक । कुल 360 दिन का 180 दिन मेडिकल आधार पर शेष अन्य आधार पर एक बार में 90 दिन से अधिक नही । स्थायी सेवा के राज्य कर्मचारी को निम्नांकित शर्तों पर स्वीकृत किया जा सकजा है ।

क- अवकाश स्वीकृत करने वाला प्राधिकारी इस बात से सन्तुष्ट हो कि ऐसा कर्मचारी अदेय अवकाशों से अवकाश की समाप्ति के बाद सेवा पर वापस उपस्थित हो जायेगा ।

ख -अदेय अवकाशों की संख्या उस अनुमोदित संख्या से अणिक नही होगी जों एक राज्य कर्मचारी ऐसे अवकाशें से वापिस आकर उतनी ही संख्यामें अर्द्ध वेतन अवकाश अर्जित कर सके ।

ग-सम्पूर्ण सेवाकाल में 360 दिन से अधिक अदेय अवकाश नही दिया जायेगा जिसमें से एक समय में 90 दिन से अधिक का नहीं होगा तथा 180 दिन तक का अवकाश चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधार पर तथा शेष अन्य कारणो से स्वीकृत किया जा सकता है । चिकित्सा प्रमाण – पत्र बीमारी के आधार पर अदेय अवकाश प्रपप्त करने के लिए कर्मचारी को एक प्राधिकृत चिकित्सक से प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा ।

घ-अदेय अवकाश स्वीकृत किये जाने पर कर्मचारी के अर्द्ध वेतन अवकाशों के खाते में नाम लिखा जायेगा तथा उसका समायोजन ऐसे कर्मचारी द्वारा अदेय अवकाशों के उपभोग के बाद भविष्य में अर्जित किये जाने वाले अर्द्धवेतन अवकाशों से किया जायेगा नियम 93 (3) ग तथा घ

नियमित नियुक्ति के बाद 3 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने पर इस नियम के उपनियम 2 तथा 3 में वर्णित रूपान्तरित अवकाश तथा अदेय अवकाश स्वीकार किये जा सकेगें ।

जब किसी कर्मचारी को इस नियम के उपनियम 2 अथवा 3 के अन्तर्गत अवकाश अथवा अदेय अवकाश स्वीकृत किया गया गया है और ऐसे कर्मचारी की सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाती है अथवा सेवा नियम 228 के अन्तर्गत असमर्थता के आधार पर सेवा से निवृत कर दिया जाता हो अथवा सेवानियम 244(2) के अनुसार अनिवार्य रूप से सेवा निवृत कर दिया जाता हो तो उससे अवकाश वेतन सम्बन्धी कोई वसूली , यदि बनती हो तो नही की जायेगी । अन्य समस्त मामलों में जैसे त्याग-पत्र , सवैच्छिक सेवानिवृति प्राप्त करने सेवा से निष्कासित करने अथवा बर्खास्त आदि के मामलों में अवकाश वेतन की वसूली यदि नियमों के अनुसार बनती हो तो अवश्य की जायेगी ।

टीबी रोग से ग्रस्त कर्मचारियों की असाधारण अवकाश के बदले मे अर्द्ध वेतन की सुविधा -जब एक कर्मचारी टीबी रोग के उपचार के लिए असाधारण प्राप्त करता है एवं वह स्वस्थ होकर अपने पद का कार्य भार वापिस ग्रहण कर लेता है ऐसे कर्मचारी द्वारा पूर्व में उपभ्रेग किये गये असाधारण अवकाशों के बाद अर्जित अर्द्ध वेतन अवकाशों में परिवर्तन कर दिया जावेगा अथवा अर्द्धवेतन अवकाशों के लेखों मे समाोजित कर दिया जायेगा । ऐसी चिकित्सा के लिए उसे राजकीय चिकित्सा प्रशासनिक अधिकारी विशेषज्ञ द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण – पत्र प्राप्त करना पड़ेगा कि वह उसके उपचार में है तथा अवकाश की समाप्ति के बाद कर्मचारी के पूर्ण स्वस्थ होने की पूर्ण सम्भावना है ।

Leave rules (अवकाश नियम)असाधारण अवकाश -निम्नांकित विशेष परिस्थितियों में एक राज्य कर्मचारी को असाधारण अवकाश दिया जा सकता है ।

1. जब नियमों के अन्तर्गत उसे कोई अन्य अवकाश / स्वीकृत नही हो अथवा

2. जब अन्य अवकाश प्राप्त किये जा सकते हो । किन्तु कर्मचारी स्वयं असाधारण अवकाश स्वीकृत करने के लिए आवेदन करता हो नियम 96 ( क)

अन्य अवकाश बकाया होने पर विशेष परिस्थितियों में ही असाधारण अवकाश स्वीकृत होगा । (दिनांक16 फरवरी 1995)

Leave rules (अवकाश नियम)अध्ययन अवकाश – नियम 115

>> तीन वर्ष से कम की सेवा और 20 वर्ष के बाद अध्ययन अवकाश स्वीकृत नही किये जायेंगे ।

>> अधितम 2 वर्ष की अवधि तक ही स्वीकृत किया जा सकेगा । विशेष परिस्थिति में राज्य सरकार जनहित मे 3 साल तक बढा सकती है ।

>> अवकाश एम. एल./पी. एल. के रूप में सवैतनिक हो सकते है अन्यथा अवैतनिक होगे जिनका पेशन की अवधि के लिए सक्षम स्वीकृति होने पर गणना की जायेगी अन्यथा पूर्व की सेवाएँ जब्त की जा सकेगी ।

>> इसलिए अध्ययन अवकाश स्वीकृत होने पर ही प्रस्थान करे जिसके लिए प्राधिकृत अधिकारी को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त करे ।

>> अकादमिक परीक्षाओ के लिए कार्यालयाध्यक्ष को जुलाई माह में सूचित किया जाना चाहिए । उच्चाधिकारियों की स्वीकृति आवश्यक नही ।

>> अध्ययन अवकाश में अर्द्धवेतन अवकाश दिया जायेगा अध्ययन अवकाश के साथ अन्य अवकाश स्वीकृत किये जाने पर अवकाश की प्रकृति के अनुरूप वेतन मिलेगा। सेवा नियम 113 (2)

>> कर्मचारी को किसी प्रकार का अध्ययन भत्ता नहीं मिलेगा यदि वह अध्ययन अवकाश वेतन प्राप्त करता है ।

>> विशेष परिस्थिति में छात्रवृति की राशि मिलाकर भी अध्ययन भत्ते से कम हो । सेवा नियम 19

>> विधवा/परित्यक्ता अध्यापिका को अध्ययन अवकाश की स्वीकृति हेतु उपनिदेशक सक्षम नही है । शिविरा/ मा/प्रा/संस्था /शिक्षक/ एफ / 5 / 1057/98/10-28 दिनांक 11.09.2001

>> अस्थायी कर्मचारी को तीन साल की कम सेवा पर अध्ययन अवकाश नही दिया जाना चाहिए । तीन साल बाद जनहित में दिया जायेगा ।

>> पदोन्नति एवं पेंशन के लिए अध्ययन अवकाश की अवधि के रूप में गिना जायेगा । नियम 121

>> बन्ध पत्र अध्ययन अवकाश- में राज्य कर्मचारी पर किया गया वेतन आदि का खर्च ब्याज सहित दोगुना वसूला जायेगा यदि वह अध्ययन अवकाश से सेवा में लौटे बिना ही सेवामुक्त हो जाते है या त्यागपत्र दे देते है ।( नियम 121 अ)

>> सभी प्रकार के अवकाश प्रार्थना-पत्रों में अवकाश कालीन के साथ संस्था प्रधान की स्थिति में आपके बाद प्रथम सहायक का नाम व मोबाईल नम्बर अवश्य लिखे ।

>> वर्तमान व्यवस्था के अनुरूप उच्च प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालयों के संस्था प्रधानो का अवकाश आदर्श विद्यालय के संस्था प्रधान/पंचायत प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत किये जायेंगे । शिक्षको के स्वयं संस्था प्रधान स्वीकृत करेंगें।