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Study leave rules for Chhatisgarh State government Employees

अध्ययन अवकाश स्वीकृति की शर्तें . – (1) इन नियमों में विनिर्दिष्ट शर्तो के अध्यधीन रहते हुए, किसी शासकीय सेवक को लोक सेवा की अत्यावश्यकताओं को ध्यान में रखते हुये भारत में अथवा भारत के बाहर किसी विशिष्ट अध्ययन पाठ्यक्रम, जिसमें किसी व्यावसायिक या तकनीकी विषय में उच्चतर शिक्षा या विशेषीकृत प्रशिक्षण शामिल है तथा जिसका उसके कार्यक्षेत्र से सीधा और निकट संबंध है, के लिये अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है

(2) अध्ययन अवकाश निम्न हेतु भी स्वीकृत किया जा सकता है –

(एक) ऐसा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम या अध्ययन यात्रा हेतु, यदि ऐसा प्रशिक्षण पाठ्यकम या अध्ययन यात्रा को लोकहित की दृष्टि से शासन के लिये निश्चित लाभ का होना प्रमाणित किया गया हो तथा शासकीय सेवक के कार्यक्षेत्र से संबंधित हो जिसमें शासकीय सेवक किसी नियमित शैक्षणिक अथवा अर्ध शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल न भी हुआ हो; और

(दो) लोक प्रशासन के स्वरूप या पृष्ठभूमि से संबंधित अध्ययन के प्रयोजनों के लिए निम्न शर्तो के अधीन कि –
(क) विशिष्ट अध्ययन या अध्ययन-यात्रा अध्ययन अवकाश स्वीकृत करने हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित होनी चाहिए; और
(ख) शासकीय सेवक से यह अपेक्षा की जानी चाहिए कि अपनी वापसी पर उसके द्वारा अध्ययन अवकाश की अवधि में किये गये कार्यों का पूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जायेगा ।

(तीन) ऐसे अध्ययन हेतु जिसका शासकीय सेवक के कार्य के साथ सीधा और निकट संबंध नहीं है, किन्तु उसका ज्ञान इस प्रकार विस्तारित हो कि एक लोकसेवक के रूप में उसकी योग्यता बढ़ाने में सहायक हो और वह लोकसेवा की अन्य शाखाओं में कार्यरत कर्मचारियों को सहयोग देने में अपने आप को अधिक सुसज्जित महसूस कर सके ।

(3) अध्ययन अवकाश स्वीकृत नही किया जायेगा जब तक कि-

(एक) प्रशासकीय विभाग द्वारा यह प्रमाणित नहीं किया जाये कि प्रस्तावित अध्ययन पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण लोकहित की दृष्टि से निश्चित लाभकारी होगा;
(दो) यह शैक्षणिक अथवा साहित्यिक विषयों के अतिरिक्त अन्य विषयों के अध्ययन के लिये न हो;

परन्तु यह कि किसी विशेषज्ञ या तकनीकी व्यक्ति को, प्रत्येक मामले में गुणदोष के आधार पर ऐसे स्नातकोत्तर पाठ्यकम के अध्ययन के लिये जिसका उसके कार्यक्षेत्र के साथ सीधा संबंध हो, अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है, यदि संबंधित विभाग के सचिव द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि उक्त अध्ययन पाठ्यक्रम उस विशेषज्ञ या तकनीकी व्यक्ति को, यथास्थिति, उसके कार्यक्षेत्र में होने वाले आधुनिक विकास के साथ जोड़े रखने में सहायक होगा, उसके तकनीकी स्तर तथा योग्यता में सुधार लायेगा और इस प्रकार से विभाग को पर्याप्त लाभ मिलेगा ।

(तीन) यदि ऐसा अवकाश भारत के बाहर के लिये है, तो, भारत शासन वित्त कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय, अध्ययन अवकाश की स्वीकृति सहित विदेशी मुद्रा विमुक्त करने के लिये सहमत हो

(4) ऐसे विषय हेतु जिनके अध्ययन के लिये भारत में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं भारत के बाहर के लिये अध्ययन अवकाश स्वीकृत नहीं किया जायेगा ।

(5) अध्ययन अवकाश ऐसे नियमित शासकीय सेवक को स्वीकृत किया जा सकेगा, जो –

(एक) परिवीक्षा अवधि संतोषप्रद रूप से पूर्ण कर चुका है और परिवीक्षा अवधि तथा तदर्थ रूप से की गई सेवा को शामिल करते हुये शासन के अधीन कम से कम पांच वर्ष की नियमित सेवा कर चुका है ;
(दो) अवकाश समाप्त होने के पश्चात अपने कर्तव्य पर लौटने की संभावित तिथि से तीन वर्ष के भीतर अधिवार्षिकी आयु पर पहुंचनें वाला न हो;
(तीन) अवकाश समाप्त होने के बाद तीन वर्षों तक शासकीय सेवा करने की वचनबद्धता हेतु नियम 49 में दिये गये अनुसार एक बंधपत्र निष्पादित करता है।

(6) शासकीय सेवक को अध्ययन अवकाश ऐसी बारम्बारता के साथ स्वीकृत नहीं किया जायेगा जिससे उसका नियमित कार्य से संपर्क समाप्त हो जाये अथवा उसकी अवकाश पर अनुपस्थिति संवर्गीय कठिनाई का कारण बने ।

अध्ययन अवकाश की स्वीकृति –

(1) शासकीय सेवक को अध्ययन अवकाश प्रशासकीय विभाग द्वारा स्वीकृत किया जायेगा ।
(2) जहां शासकीय सेवक एक विभाग अथवा स्थापना के संवर्ग में स्थायी पद होते हुये किसी दूसरे विभाग या स्थापना में अस्थाई रूप से सेवारत हो, उसे अध्ययन अवकाश की स्वीकृति इस शर्त के अधीन दी जायेगी कि अवकाश स्वीकृति के पूर्व उस विभाग की सहमति प्राप्त की जाए जिस विभाग से बह स्थायी रूप से संबद्ध है ।
(3) अध्ययन पाठ्यक्रम के पूर्ण होने पर, शासकीय सेवक उस प्राधिकारी को जिसने अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया था, पाठ्यक्रम के प्रभारी प्राधिकारी का परीक्षा उत्तीर्ण होने अथवा विशिष्ठ अध्ययन पाठ्यक्रम में शामिल होने संबंधी प्रमाणपत्र, जिसमें पाठ्यक्रम के प्रारंभ होने तथा समाप्त होने की तिथि तथा अभ्युक्ति, यदि कोई हो, अंकित होना चाहिए, प्रस्तुत करेगा ।

एक समय पर तथा संपूर्ण सेवाकाल में स्वीकृति योग्य अधिकतम अध्ययन अवकाश की मात्रा. –
अध्ययन अवकाश की अधिकतम मात्रा, जो शासकीय सेवक को स्वीकृत की जा सकेगी निम्नानुसार होगी
(एक) सामान्यतया किसी एक समय में बारह महीने जिसमें आपवादिक कारणों को छोड़कर वृद्धि नहीं की जायेगी, और
(दो) संपूर्ण सेवाकाल में, कुल मिलाकर 24 महीने ( अध्ययन अथवा प्रशिक्षण हेतु किन्ही अन्य नियमों के अधीन स्वीकृत इसी प्रकार के अवकाश को सम्मिलित करते हुये)।

अध्ययन अवकाश का लेखांकन तथा अन्य प्रकार के अवकाश के साथ संयोजन,-

(1) अध्ययन अवकाश को शासकीय सेवक के अवकाश लेखा के विरुद्ध विकलित नहीं किया जायेगा ।
(2) अध्ययन अवकाश को अन्य प्रकार के अवकाश के साथ संयोजित किया जा सकता है, किन्तु किसी भी मामले में इस अवकाश की और असाधारण अवकाश को छोड़कर अन्य अवकाश की स्वीकृति के फलस्वरूप शासकीय सेवक की नियमित कर्तव्य से सम्मिलित अनुपस्थिति सामान्यतः अट्ठाईस माह से अधिक तथा ऐसा पाठ्यक्रम, जिससे पी. एच.डी. की उपाधि अथवा अठ्ठाईस माह से अधिक अवधि की स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त होती है, के लिये छत्तीस माह से अधिक नहीं होगी ।
(3) शासकीय सेवक जिसे अध्ययन अवकाश किसी अन्य प्रकार के अवकाश के संयोजन में स्वीकार किया गया है, यदि चाहे तो, अपना अध्ययन, अन्य प्रकार के अवकाश समाप्त होने के पहले ही स्वीकार या प्रारंभ कर सकता है, किन्तु अध्ययन पाठ्यक्रम के साथ युक्त ऐसा अवकाश काल, अध्ययन अवकाश के रूप में संगणित नहीं होगा

टिप्पणी- उप-नियम (2) में विहित अनुपस्थिति की सीमा में विश्रामावकाश शामिल है ।

अध्ययन पाठ्यक्रम से आगे के अध्ययन अवकाश का विनियमन.-
जब अध्ययन पाठ्यक्रम, स्वीकृत अध्ययन अवकाश से पहले पूरा हो जाये तो, शासकीय सेवक अध्ययन पाठ्यक्रम की समाप्ति पर अपना कार्यभार पुनर्ग्रहण करेगा, बशर्ते कि अवकाश स्वीकृत करने हेतु सक्षम प्राधिकारी से अतिरिक्त अवधि को सामान्य अवकाश के समान मानने हेतु पूर्वानुमति न प्राप्त कर ली गई हो ।

अवकाश वेतन के अतिरिक्त भत्ते की पात्रता. – शासकीय सेवक को स्वीकृत अध्ययन अवकाश की अवधि में महंगाई भत्ते के अलावा, किसी अन्य प्रकार के भत्ते की पात्रता नहीं होगी ।

यात्रा भत्ते की स्वीकृति.- शासकीय सेवक को सामान्यतः यात्रा भत्ते का भुगतान नहीं किया जायेगा, किन्तु अपवादिक परिस्थितियों में राज्यपाल ऐसे भत्ते के भुगतान की स्वीकृति दे सकते हैं ।

बन्धपत्र का निष्पादन.– ऐसा प्रत्येक स्थायी शासकीय सेवक जिसे अध्ययन अवकाश अथवा ऐसे अवकाश में वृद्धि स्वीकृत की गई है. को स्वीकृत अध्ययन अवकाश अथवा अवकाश में वृद्धि प्रारंभ होने की तिथि के पूर्व, यथास्थिति, प्रपत्र-5 अथवा 6 में दिये अनुसार बन्धपत्र निष्पादित करना होगा । यदि किसी अस्थाई शासकीय सेवक को अध्ययन अवकाश अथवा इसमें वृद्धि स्वीकृत की गई है, तो यथास्थिति, प्रपत्र- 7 या प्रपत्र- 8 में दिये अनुसार बन्धपत्र निष्पादित करना होगा।

अध्ययन अवकाश के पश्चात अथवा अध्ययन पाठ्यक्रम पूर्ण होने के पूर्व त्यागपत्र अथवा सेवानिवृत्ति.-
(1) यदि कोई शासकीय सेवक, अध्ययन अवकाश की कालावधि के पश्चात कर्त्तव्य पर लौटे बिना अथवा कर्तव्य पर लौटने के तीन वर्ष की कालावधि के भीतर सेवा से त्यागपत्र देता है सेवानिवृत्त होता है अथवा अन्यथा सेवा त्यागता है अथवा अध्ययन पाठ्यक्रम पूर्ण नही करता है तथा इस प्रकार से नियम 43 के उप- नियम (3 ) के अनुसार अपेक्षित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में असमर्थ रहता है, तो उसे निम्नानुसार वापस करना होगा –
(एक) अवकाश वेतन की वास्तविक राशि, शासन द्वारा भुगतान किये गये शुल्क का मूल्य, यात्रा एवं अन्य व्यय, यदि कोई हो ; तथा
(दो) अध्ययन पाठ्यक्रम के संबंध में अन्य एजेन्सी यथा विदेशी सरकार, किसी संस्थान या न्यास द्वारा किया गया वास्तविक व्यय, यदि कोई हो, इसके अलावा उसका त्यागपत्र स्वीकृत करने अथवा सेवानिवृत्त होने की अनुमति देने अथवा उसके अन्यथा सेवा छोड़ने से पहले, उस राशि पर मांग की तिथि से 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी वापस करना होगा :

परन्तु यह कि ऐसे कर्मचारी जो अध्ययन् पाठ्यक्रम पूर्ण करने में असफल रहते हैं, के प्रकरणों को छोड़कर, इस नियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे-

(क) उस शासकीय सेवक को, जिसे अध्ययन अवकाश से वापस लौटने पर चिकित्सा कारणों से सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी गई है अथवा
(ख) उस शासकीय सेवक को, जिसे अध्ययन अवकाश से वापस लौटने पर किसी स्वशासी निकाय अथवा शासन के नियंत्रणाधीन किसी संस्था में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया हो, तथा पश्चात्वर्ती समय में उक्त वैधानिक या स्वशासी निकाय अथवा संस्था में स्थाई संविलियन की दृष्टि से लोकहित में त्यागपत्र देने की अनुमति दी गई हो ।

(2) (क) ऐसे शासकीय सेवक द्वारा उपभोग किये गये अध्ययन अवकाश को अध्ययन अवकाश प्रारंभ होने की तिथि को उसके खाते में जमा नियमित अवकाश में संपरिवर्तित किया जावेगा, अध्ययन अवकाश के अनुक्रम में लिया गया कोई नियमित अवकाश, इस प्रयोजन के लिये उपयुक्त तरीके से समायोजित किया जायेगा तथा अध्ययन अवकाश की शेष अवधि, यदि कोई हो, जिसे इस प्रकार से संपरिवर्तित नहीं किया जा सका है, असाधारण अवकाश जैसा समझा जायेगा ।

(ख) शासकीय सेवक द्वारा उप-नियम ( 1) के अधीन लौटाई जाने वाली राशि के अलावा यदि वास्तविक रूप से आहरित वेतन, अध्ययन अवकाश के संपरिवर्तन के फलस्वरूप स्वीकार्य अवकाश वेतन से अधिक है तो उसे ऐसे आधिक्य की राशि भी वापस करना होगा ।

(3) नियमों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि यह आवश्यक हो अथवा ऐसा किया जाना उचित समझा जाये तो राज्यपाल के आदेश से, लोकहित में किसी प्रकरण अथवा किसी वर्ग के प्रकरणों की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुये संबंधित शासकीय सेवक अथवा शासकीय सेवकों के उस वर्ग को उप- नियम(1 ) के अधीन वापसी हेतु अपेक्षित राशि की वापसी से छूट दी जा सकती है या राशि कम की जा सकती है ।

अध्ययन अवकाश की अवधि में अवकाश वेतन.-

(1) अध्ययन अवकाश के उपभोग के दौरान, शासकीय सेवक उस वेतन (महंगाई भत्ते के अतिरिक्त अन्य भत्तों के बिना) के समान अवकाश वेतन आहरित करेगा जो ऐसे अवकाश में जाने के ठीक पहले शासकीय कर्तव्य के दौरान आहरित किया था ।

(2) (क) पूर्ण दर पर अवकाश वेतन का भुगतान शासकीय सेवक द्वारा इस आशय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के अध्यधीन होगा कि उसे किसी अंशकालीन नियोजन के संबंध में कोई छात्रवृत्ति, शिष्यवृत्ति या पारिश्रमिक प्राप्त नहीं हुआ है ।
(ख) शासकीय सेवक द्वारा अध्ययन अवकाश की अवधि में किसी अंशकालीन नियोजन के संबंध में छात्रवृत्ति या शिष्यवृत्ति या पारिश्रमिक के रूप में यदि कोई राशि प्राप्त की गई हो तो, उसे इस उप-नियम के अधीन भुगतान योग्य अवकाश वेतन के विरूद्ध इस शर्त के अधीन समायोजित किया जायगा कि ऐसी अवकाश वेतन की राशि, अर्धवेतन अवकाश काल में, अवकाश वेतन की तरह भुगतान योग्य राशि से कम न हो ।

अध्ययन अवकाश का पदोन्नति, पेंशन, वरिष्ठता, अवकाश एवं वेतनवृद्धि हेतु गणना.- अध्ययन अवकाश को पदोन्नति, पेंशन तथा वरिष्ठता हेतु सेवा के रूप में गिना जायेगा। इसे मूलभूत नियम के नियम 26 के प्रावधानानुसार वेतनवृद्धि हेतु भी सेवा के रूप में गिना जायेगा

अध्ययन अवकाश हेतु आवेदन पत्र –

( 1) (क) अध्ययन अवकाश हेतु प्रत्येक आवेदन पत्र उचित माध्यम से अवकाश स्वीकृत करने हेतु सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत किया जायेगा ।
(ख) शासकीय सेवक द्वारा अध्ययन हेतु परिकल्पित पाठ्यक्रम या अध्ययन पाठ्यक्रम तथा ऐसी किसी परीक्षा जिसमें उसका शामिल होना प्रस्तावित हैं, का ऐसे आवेदन पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया जायगा ।

(2) जहां शासकीय सेवक द्वारा उसके आवेदन पत्र में पूर्ण विवरण देना संभव नहीं है, अथवा यदि, भारत छोड़ने के पश्चात वह भारत में अनुमोदित कार्यक्रम में कोई परिवर्तन करना चाहता है, तो वह यथाशीघ्र इसका विवरण दूतावास प्रमुख अथवा अवकाश स्वीकृत करने हेतु सक्षम प्राधिकारी को, यथास्थिति, प्रस्तुत करेगा, तथा तब तक अध्ययन पाठ्यकम प्रारंभ नहीं करेगा अथवा इससे संबंधित कोई व्यय नहीं करेगा, जब तक कि पाठ्यकम के लिये अवकाश स्वीकृत करने हेतु सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन प्राप्त न हो जाये, बशर्ते कि वह ऐसा स्वयं के दायित्व पर करने के लिये तैयार न हो ।