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Chhattisgarh Civil Services (Leave) Rules 2010

Chhattisgarh Civil Services (Leave) Rules 2010 (छत्तीसगढ़ सिविल सेवाएं (अवकाश) नियम 2010)

अधिसूचना

भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियो को प्रयोग में लाते हुए, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एतद्द्वारा निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थात्:-

नियम
अध्याय – एक
प्रारंभिक

  1. संक्षिप्त नाम एवं प्रारंभ.-
    (1) ये नियम छत्तीसगढ़ सिविल सेवाएं (अवकाश) नियम 2010 कहलायेगें।
    (2) ये 1 अक्टूबर 2010 से प्रवृत्त होंगे ।
  1. प्रयुक्ति का क्षेत्र.-
    इन नियमों में अन्यथा उपबंधित को छोड़कर, ये नियम उन सभी शासकीय सेवकों पर लागू होंगे, जो इन नियमो के लागू होने की तिथि पर सेवा में हैं, एवं जो राज्य के कार्य से संबंधित सिविल सेवाओं तथा पदो पर नियुक्त है, किन्तु निम्नलिखित को लागू नहीं होंगे:-
    (क) आकस्मिक अथवा दैनिक दर अथवा अंशकालीन नियोजन में नियुक्त व्यक्तियों पर;
    (ख) आकस्मिकता से भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्तियों पर;
    (ग) कार्यभारित स्थापनाओं में नियोजित व्यक्तियों पर;
    (घ) जहाँ संविदा में अन्यथा उपबंधित हों, को छोड़कर संविदा पर नियोजित व्यक्तियों पर;
    (ङ) (ड.) ऐसे व्यक्तियों पर जिनके संबंध में संविधान अथवा संविधान के किसी उपबन्ध अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के द्वारा या के अधीन विशिष्ट प्रावधान किया गया हो;
    (च) राज्य शासन के किसी विभाग के अधीन केन्द्र शासन अथवा किसी अन्य स्त्रोत से सीमित अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति पर सेवारत व्यक्तियों पर;
    (छ) अखिल भारतीय सेवा के सदस्यों पर ।
  1. परिभाषाएं.-
    (1) इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो.-
    (क) ‘‘सेवा का पूर्ण वर्ष’’ या ‘‘एक वर्ष की निरंतर सेवा’’ से अभिप्रेत है, राज्य शासन के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि की निरंतर सेवा तथा जिसमें कर्तव्य पर व्यतीत अवधि के साथ असाधारण अवकाश को शामिल करते हुए ली गई अवकाश की अवधि शामिल है ;
    (ख) शासकीय सेवक के संबंध में ‘‘सेवानिवृत्ति की तिथि’’ अथवा ‘‘उसके सेवानिवृत्ति की तिथि’’ से अभिप्रेत है, उस माह के अंतिम दिन का अपरान्ह् जिसमें शासकीय सेवक उसकी सेवा को शासित करने वाले निबंधन एवं शर्तो के अधीन सेवानिवृत्ति हेतु निर्धारित आयु प्राप्त करता है;
    (ग) ‘‘बाह्य सेवा’’ से अभिप्रेत है, ऐसी सेवा, जिसमें शासकीय सेवक अपना वेतन भारत की संचित निधि अथवा किसी अन्य राज्य की संचित निधि अथवा किसी केन्द्र शासित प्रदेश की संचित निधि के अलावा शासन की स्वीकृति से किसी अन्य स्त्रोत से प्राप्त करता है ;
    (घ) ‘‘प्रपत्र’’ से अभिप्रेत है, इन नियमों के साथ संलग्न प्रपत्र ;
    (ङ) ‘‘अर्धस्थाई सेवा में शासकीय सेवक’’ से अभिप्रेत है, ऐसा शासकीय सेवक जिसे छत्तीसगढ़ शासकीय सेवक (अस्थाई एवं अर्धस्थाई सेवा) नियम, 1960 के अंतर्गत अर्धस्थाई घोषित किया गया हो अथवा माना गया हो ;
    (च) ‘‘स्थाई सेवा में शासकीय सेवक’’ से अभिप्रेत है, ऐसा शासकीय सेवक जो किसी स्थाई पद को मौलिक रूप से अथवा अनन्तिम मौलिक रूप से धारण करता है, अथवा जो किसी पद पर धारणाधिकार रखता है, अथवा यदि उसका धारणाधिकार निलंबित नहीं किया गया होता तो उसका स्थायी पद पर धारणाधिकार होता ;
    (छ) ’’विश्रामावकाश विभाग’’ से अभिप्रेत है, ऐसा विभाग या विभाग का वह भाग, जिसमें नियमित विश्रामावकाश की अनुमति इस अवधि में दी जाती है, जिसमें विभाग में सेवारत शासकीय सेवकों को अपने कर्तव्य से अनुपस्थित रहने की अनुमति दी गई हो ।
    (2) यहाँ प्रयुक्त शब्द एवं अभिव्यक्तियां जो अपरिभाषित है किन्तु मूलभूत नियमों में परिभाषित है का क्रमशः वही अर्थ होगा जो मूलभूत नियमों में उनके लिए समुनदेशित है ।

4.    अस्थाई स्थानान्तरण पर या बाह्यसेवा पर शासकीय सेवक.-

(1) शासकीय सेवक जिन्हें ये नियम लागू होते हैं केन्द्र शासन या किसी अन्य राज्य शासन या केन्द्र शासित प्रदेश में अस्थाई स्थानान्तरण के दौरान या भारत में बाह्यसेवा के समय, इन्हीं नियमों द्वारा निरंतर शासित होंगे।

(2) ऐसे शासकीय सेवकों के मामले में जो भारत के बाहर बाह्यसेवा (भारत में या भारत के बाहर यू0एन0 अभिकरण की सेवा को शामिल कर) में या केन्द्रीय सशस्त्र बल में अस्थाई स्थानान्तरण पर हो, ये नियम, यथास्थिति, केवल बाह्यसेवा या अस्थाई स्थानान्तरण के निबंधन एवं शर्तो में उपबंधित सीमा तक लागू होंगे।

5.    अन्य अवकाश नियमों द्वारा शासित सेवाओं अथवा पदों से स्थानान्तरण.-

जब तक कि इन नियमों में अन्यथा उपबंधित न हो, स्थायी शासकीय सेवक जिसे ये नियम लागू नहीं होते हैं:-

(क) जब किसी ऐसी सेवा या पद पर अस्थायी रुप से स्थानांतरित हों, जिसमें ये नियम लागू होते है उन अवकाश नियमो के अध्यधीन बने रहेंगे जो ऐसे स्थानान्तरण के पूर्व उस पर लागू थे; और

(ख) जब वह किसी ऐसे स्थाई पद पर मौलिक रूप से नियुक्त हों, जिसे ये नियम लागू होते हैं, तो ऐसी नियुक्ति की तिथि से इन नियमो के अध्यधीन होंगे, ऐसे मामले में उस पर पूर्व में लागू नियमों के अधीन उसके खाते में जमा अवकाश, नियम 25 में दिये गये अनुसार संचय की अधिकतम सीमा के अध्यधीन कैरी फारवर्ड किये जायेंगे । कैरी फारवर्ड किये गये अवकाश के संबंध में, अवकाश वेतन का वहन उस विभाग या शासन द्वारा किया जायेगा जहाँ से शासकीय सेवक, अवकाश पर प्रस्थान करता है ।