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आदर्श विद्यालय योजना राजस्थान

  1. प्रस्तावना

माननीया मुख्यमंत्री महोदया ने वर्ष 2015-16 के बजट अभिभाषण में प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक विद्यालय (सामान्यतया कक्षा 1 से 12/10 का विद्यालय) को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। आदर्श विद्यालय ग्राम पंचायत के अन्य विद्यालयों के लिए मार्गदर्शी विद्यालय (Mentor School) एवं संदर्भ्य केन्द्र (Resource Centre) के रूप में कार्य करेंगे। आगामी तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु सभी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जाकर इन विद्यालयों (Cetre of Excellence) के रूप में विकसित किया जाएगा।

  1. चयन प्रक्रिया

राज्य सरकार के पत्र क्रमांक प. 14 (4) शिक्षा-1/2014 दिनांक 05.01.2015 परिशिष्ट-1 द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में विकसित होने वाले आदर्श विद्यालय के चयन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक विद्यालय का चयन कर सूची राज्य सरकार को प्रेषित की गई है। इन विद्यालयों को 31 मार्च, 2018 तक आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जाना है। प्रथम चरण ( 31 मार्च, 2016 तक), द्वितीय चरण ( 31 मार्च 2017 तक) एवं तृतीय चरण ( 31 मार्च, 2018 तक) में विकसित किए गए जाने वाले आदर्श विद्यालयों की

जिलेवार संख्या परिशिष्ट-2 पर संलग्न है। आदर्श विद्यालयों की जिलेवार/पंचायत समिति बार सूची व विस्तृत विवरण शिक्षा विभाग की वेबसाइट (www.eudcation.rajasthan.gov.in/secondary) पर उपलब्ध है।

3. आदर्श विद्यालयों को विकसित करने हेतु कार्ययोजना

3.1 भौतिक अवसंरचना (Physical Infrastructure )

3.1.1 विद्यालय भवन

आदर्श विद्यालयों में निर्धारित मानदण्डानुसार पर्याप्त मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता (कक्षा कक्ष, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, पेयजल सुविधा, बालक व बालिकाओं के लिए पृथक-पृथक् शौचालय, विद्युत कनेक्शन, फर्नीचर आदि) चरणबद्ध रूप से करवाई जाए। इस हेतु निम्नानुसार कार्यवाही की जाए :

(i) भवन उन्नयन हेतु राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) एवं सर्व शिक्षा अभियान (SSA) योजनाओं में उपलब्ध वित्तीय प्रावधानों का उपयोग किया जाएगा। RMSA/SSA की वार्षिक कार्ययोजना बनाते समय यू – डाइस डेटा का सत्यापन कर Infrastructural gap के आधार पर प्लान तैयार किया जाए।

(ii) RMSA/SSA योजनाओं में उपलब्ध वित्तीय प्रावधानों के अतिरिक्त विद्यालय भवनों का विकास राज्य सरकार की अन्य योजनाओं यथा, नरेगा, MLA LAD/MP LAD तथा भामाशाहों, दानदाताओं एवं सीएसआर के माध्यम से किया जाए।

(iii) इस कार्य में विद्यालय के छात्रकोष/विकास कोष की राशि का उपयोग भी किया जाए। निदेशक माध्यमिक शिक्षा द्वारा विद्यालयों के छात्रकोष/विकास कोष के उपयोग हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो परिशिष्ट-3 पर हैं।

(iv) आदर्श विद्यालयों में खेलकूद सुविधाओं का विकास किया जाएगा। खेल मैदान एवं वृक्षारोपण का कार्य संबंधित ग्राम पंचायतों के माध्यम से नरेगा के तहत किया जाए। इस संबंध में मुख्य सचिव महोदय के स्तर पर आयोजित बैठक दिनांक 82.2015 का कार्यवाही विवरण परिशिष्ट-4 पर संलग्न है। जिन विद्यालयों में खेल मैदान हेतु पर्याप्त भूगि उपलब्ध नहीं है उनके खेल मैदान हेतु उपयुक्त भूमि आवंटित करवायी जाकर खेल मैदान / सुविधाएँ विकसित की जाए।

3.1.2 आईसीटी (ICT) लैब की स्थापना

3.1.2.1 समस्त आदर्श विद्यालयों में कम्प्यूटर लैब, इंटरनेट कनेक्टिविटि की उपलब्धता एवं कक्षा शिक्षण में आईसीटी का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

3.1.2.2 वर्तमान में राज्य के 4802 आदर्श विद्यालयों में तीन चरणों में आईसीटी योजना के अन्तर्गत कम्प्यूटर लैब की स्थापना की जा चुकी है। शेष विद्यालयों में [email protected] योजना के अन्तर्गत कम्प्यूटर लैब की स्थापना चरणबद्ध रूप से की जायेगी। इस हेतु दानदाताओं/भामाशाहों/MLA LAD/MP LAD से भी सहयोग लिया जाए।

3.1.2.3 आईसीटी प्रथम एवं द्वितीय चरण के तहत स्थापित कम्प्यूटर लैब का संवर्धन (augmentation) एवं रखरखाव School facility grant / छात्र कोष / विकास कोष एवं भामाशाहों दानदाताओं / स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।

3.1.2.4 जिन विद्यालयों में कम्प्यूटर लैब स्थापित है, उनमें इंटरनेट ब्रॉडबैंड कनेक्शन करवाया जाए।

3.1.2.5 शिक्षकों द्वारा विषय शिक्षण में कम्प्यूटर लैब का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। इसके अतिरिक्त सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर पर कार्य करने के अभ्यास हेतु व्यवस्था सुनिश्चित की जावे ताकि विद्यार्थियों की कम्प्यूटर साक्षरता का स्तर बढ़ सके।

3.1.2.6 विद्यालय स्तर पर आईसीटी योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा संस्था प्रधानों हेतु मार्गदर्शिका जारी की है जो www.rajrmsa.nic.in पर उपलब्ध है। इन दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जाए।

3.1.2.7 राजस्थान सरकार द्वारा E-learning हेतु विकसित School education पोर्टल का छात्र- अध्यापकों द्वारा प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

3.1.3 विद्यालय परिसर का सौन्दर्यीकरण

3.1.3.1 आदर्श विद्यालयों के परिसर की स्वच्छता एवं सौन्दर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए। इस हेतु जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों, आमजन, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

3.1.3.2 प्रत्येक माह के प्रथम एवं अन्तिम शनिवार को अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, अध्यापकों एवं विद्यार्थियों के सहयोग से विद्यालयों में स्वच्छता दिवस मनाया जाये।

3.1.3.3 आदर्श विद्यालयों में सहज दृष्ट्या स्थानों पर राज्य सरकार की आदर्श विद्यालय योजना के अन्तर्गत चयनित” लिखवाया जाना सुनिश्चित किया जाए।

3.1.3.4 आदर्श विद्यालयों की प्राथमिक कक्षाओं के कक्षा बरामदों की दीवारों को शिक्षण सामग्री के रूप में उपयोग करने के लिए लहर कक्ष के पैटर्न पर तैयार किया जाए। अन्य कक्षाओं की दीवारों पर भी विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक सामग्री को प्रदर्शित किया जाए ताकि कक्षा-कक्ष विद्यार्थियों के लिए रुचिकर, ज्ञानवर्धक एवं आकर्षक बन सके।

3.1.3.5 आदर्श विद्यालयों में कक्षा कक्ष एवं विद्यालय परिसर का माहौल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी बनाने के लिए महापुरुषों द्वारा क गये आदर्श वाक्य / सूक्तियों का लेखन कराया जाए।

3.2 आदर्श विद्यालयों में शिक्षक / अन्य कार्मिकों की उपलब्धता

आदर्श विद्यालयों में निर्धारित मानदंडों के अनुरूप शिक्षकों / अन्य कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। मानदण्डानुसार प्रत्येक विद्यालय में (i) संस्था प्रधान (ii) प्राध्यापक वरिष्ठ अध्यापक (ii) अध्यापक (iv) लेवल-2 / 1 (v) शारीरिक शिक्षक / पुस्तकालयाध्यक्ष छात्र संख्या के अनुसार उपलब्ध करवाए जाएंगे, ताकि प्रत्येक कक्षा को शिक्षण हेतु शिक्षक उपलब्ध हो सके। साथ ही निर्धारित मानदण्डों के अनुरूप मंत्रालयिक कार्मिकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। शैक्षिक, गैर शैक्षिक एवं मंत्रालयिक कार्मिकों हेतु मानदण्ड परिशिष्ट-5 पर उपलब्ध है।

3.3 आदर्श विद्यालयों का प्रभावी संचालन

3.3.1 आदर्श/समन्वित विद्यालयों (कक्षा 1 से 12/10) के प्रभावी संचालन हेतु निदेशक, माध्यमिक शिक्षा द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश पत्र क्रमांक-शिविरा-मा/माध्य/अ-1 / आदर्श वि. / 21312 / वो 2 / 2014 दिनांक 12.2.2015 जारी किए गए हैं, जो परिशिष्ट 6 पर उपलब्ध है।

3.3.2 आदर्श/विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 में कम से कम 150, कक्षा 6 से 8 में 105 तथा कक्षा 9 से 12 में प्रत्येक कक्षा में 40 से 60 विद्यार्थियों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। इस हेतु निम्नानुसार कार्यवाही की जाए –

(i) सत्र के प्रारम्भ में प्रवेशोत्सव कार्ययोजना तैयार की जाए।

(ii) विद्यालय में उपलब्ध करवाई जाने वाली सुविधाओं व विशेष योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

(iii) प्रत्येक संस्थाप्रधान व विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के लिए बालक/बालिकाओं के प्रवेश (कम से कम 5 विद्यार्थी) का लक्ष्य निर्धारित किया जाए।

3.3.3 वर्तमान में आदर्श विद्यालयों में कुल 27 लाख विद्यार्थी नामांकित हैं। इन विद्यालयों के नामांकन में आगामी तीन वर्षों (15-16, 16-17 एवं 17-18 ) में 15 लाख की वृद्धि किए जाने का लक्ष्य है। प्रत्येक जिले हेतु वर्षवार नामांकन के लक्ष्य परिशिष्ट-7 पर उपलब्ध है। प्रत्येक आदर्श विद्यालय हेतु वर्षवार नामांकन के लक्ष्य शिक्षा विभाग की वेबसाईट  www.education.rajasthan.gov.in/secondary पर उपलब्ध है। इस संदर्भ में निदेशक माध्यमिक शिक्षा द्वारा जारी दिशा निर्देश परिशिष्ट-8 पर संलग्न है।

3.3.4 शैक्षिक गुणवत्ता

3.3.4.1 State Initiative for Quality Education (SIQE) राज्य के सभी माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यायलयों में संचालित प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5 तक) के विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर उन्नयन के उद्देश्य से State Initiative for Quality Education (SIQE) प्रोजेक्ट प्रारंभ किया गया है। प्रोजेक्ट के अन्तर्गत Child Centred Pedagogy (CCP), Activity Based Learning (ABL) तथा सतत एवं व्यापक आकलन का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। योजना का क्रियान्वयन निदेशालय माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद एवं एस.आइ.ई.आर.टी. उदयपुर के माध्यम से किया जाएगा। प्रोजेक्ट की कार्ययोजना प्रशिक्षण एवं अन्य गतिविधियाँ राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा तैयार की गई हैं। प्रोजेक्ट की कार्ययोजना के क्रियान्वयन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश निदेशालय, माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर द्वारा जारी किए गए हैं जो कि परिशिष्ट-9 पर उपलब्ध हैं।

3.3.4.2 प्राथमिक कक्षाओं में SIQE की अवधारणा के अनुसार शिक्षण कार्य, मूल्यांकन एवं अभिलेख संधारण सुनिश्चित किया जाए। 3.3.4.3 शैक्षिक सुधार की कार्ययोजना तैयार कर शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए।

3.4 विद्यालय प्रबन्धन एवं सह शैक्षिक गतिविधियाँ

3.4.1 आदर्श विद्यालयों में पंचांग एवं समयसारिणी के अनुसार शैक्षणिक / सहशैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया जाए। इस हेतु पृथक से दिशा-निर्देश निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर द्वारा जारी किए गए हैं।

3.4.2 आदर्श विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियों यथा स्काउट एवं गाइड, एनएसएस, एनसीसी, इको क्लब, विज्ञान क्लब, कंप्यूगर क्लब इत्यादि का प्रभावी संचालन किया जाए।

3.4.3 आदर्श विद्यालयों में कार्ययोजना बनाकर पुस्तकालय एवं वाचनालय का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए एवं विद्यालयों में पाठक क्लब भी विकसित किए जाएं।

3.4.4 आदर्श विद्यालयों में सहशैक्षिक गतिविधियां यथा- खेलकूद, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, प्रश्नोत्तरी, मंच प्रस्तुतिकरण, संगीत, नृत्य एवं लोककलाओं पर विशेष बल दिया जाए।

3.5 आदर्श विद्यालय योजना का क्रियान्वयन एवं पर्यवेक्षण हेतु व्यवस्था |

3.5.1 राज्य स्तर पर आदर्श विद्यालय योजना की कार्ययोजना बनाने एवं क्रियान्वयन का कार्य राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद् एवं • निदेशालय माध्यमिक शिक्षा के माध्यम से किया जाएगा। समस्त आदर्श विद्यालयों में कार्ययोजना के अनुसार क्रियान्विति हेतु निदेशक माध्यमिक शिक्षा पूर्ण रूप से उत्तरदायी होंगे। राज्य स्तर पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय की अध्यक्षता में गठित राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद् की शाषी परिषद् इस योजना के क्रियान्वयन हेतु नीति निर्धारण करेगी तथा निष्पादक समिति योजना के क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना का निर्माण एवं निष्पादन करेगी ।

3.5.2 प्रशासनिक सुधार विभाग के आदेश क्रमांक 6 (27) प्र.सु. / ग्रुप – 3 / 2015 जयपुर दिनांक 15.4.2015 द्वारा जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद् की जिला निष्पादक समिति जिला स्तर पर आदर्श विद्यालय के विकास की कार्ययोजना बनाने एवं क्रियान्वयन हेतु उत्तरदायी होगा। जिले में इस योजना के क्रियान्वयन के नोडल अधिकारी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक होंगे परिशिष्ट- 10 ) 1

3.5.3 प्रत्येक पंचायत समिति में आदर्श विद्यालय योजना के क्रियान्वयन हेतु जिला कलक्टर द्वारा उपखंड अधिकारी स्तर के आरएएस अधिकारी को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। प्रभारी अधिकारी द्वारा प्रत्येक माह में एक बार पंचायत समिति में स्थित सभी आदर्श विद्यालयों के संस्थाप्रधानों की बैठक आयोजित कर विद्यालय को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किए जाने की कार्ययोजना की क्रियान्विति की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में जिला स्तर से जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा, ADPC SSA/RMSA, AEN SSA/RMSA एवं समस्त कार्यक्रम अधिकारी PO (RMSA) आवश्यक रूप से उपस्थित रहेंगे।

3.5.4 शिक्षा विभाग के समस्त जिला स्तरीय अधिकारियों को 5-10 विद्यालयों का प्रभार दिया जाए। पंचायत समिति में कार्यरत अन्य अधिकारियों यथा- विकास अधिकारी, तहसीलदार, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी इत्यादि की भागीदारी भी योजना के क्रियान्वयन हेतु सुनिश्चित की जाएगी।

3.5.5 विद्यालय स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक) की होगी। संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक विद्यालय की SDMC/SMC के माध्यम से विद्यालय को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित करने हेतु कार्ययोजना का क्रियान्वयन करवाया जाना सुनिश्चित करें।

3.5.6 पंचायत समिति स्तर पर कार्यरत अधिकारियों को 5-10 आदर्श विद्यालयों का विकास एवं प्रभावी संचालन का प्रभार दिया जाएगा। इस हेतु सम्बन्धित अधिकारी माह में कम से कम एक बार इन विद्यालयों का पर्यवेक्षण / सम्बलन सुनिश्चित करेंगे ।

3.5.7 इन विद्यालयों के प्रभावी पर्यवेक्षण हेतु राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा ऑनलाइन एमआइएस ( शाला दर्पण) विकसित किया जा रहा है जिसको चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। 3.5.8 सम्बन्धित जिला शिक्षा अधिकारी इन विद्यालयों की निरीक्षण रिपोर्ट प्रति माह टाइम्स / राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर अपलोड करेंगे ताकि फॉलोअप कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकेगी।

3.6 आदर्श विद्यालयों के विकास एवं संचालन में सामुदायिक सहभागिता एवं अन्य विभागों के साथ समन्वयन

3.6.1 सामुदायिक सहभागिता

3.6.1.1 आदर्श विद्यालयों के विकास में अभिभावकों एवं आगजन की भागीदारी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। माह में कम से कम एक बार अभिभावक शिक्षक समिति (PTA) की बैठक आयोजित की जाए। इसके अतिरिक्त विद्यालय विकास कोष एवं प्रबंधन समिति (SDMC) तथा विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) को भी प्रभावी बनाया जाए। परिशिष्ट 11 विद्यालयों की एसडीएमसी एवं एसएमसी के गठन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश निदेशक माध्यमिक शिक्षा द्वारा जारी किए गए हैं परिशिष्ट-12। 3.6.1.2 प्रत्येक आदर्श विद्यालय को किसी दानदाता / भामाशाह / जिले में स्थित औद्योगिक इकाइयों/स्वयंसेवी संस्थाओं को गोद दिया जाए।

3.6.1.3 संबंधित ग्राम पंचायत की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए।

3.6.2 अन्य विभागों के साथ समन्वयन

आदर्श विद्यालयों के विकास हेतु विभिन्न विभागों यथा-पंचायतीराज एवं महिला बाल विकास, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इत्यादि की योजनाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाये।

3.7 संस्थाप्रधान, शिक्षक एवं अन्य कार्मिकों की क्षमता

आदर्श विद्यालयों के चहुंमुखी विकास के लिए प्रत्येक स्तर पर क्षमता संवर्द्धन एवं प्रशिक्षण का प्रावधान किया जाएगा।

3.7.1 जिला शिक्षा अधिकारियों के प्रशिक्षण जिला शिक्षा अधिकारियों हेतु प्रशासनिक, प्रबंधन एवं शैक्षिक नेतृत्व के मुद्दों पर 7 दिवसीय सघन प्रशिक्षण, विशेषज्ञ संस्थाओं के माध्यम से दिया जाएगा। सीमेंट के माध्यम से जिला स्तरीय अधिकारियों हेतु रिफ्रेशर कोर्स भी करवाए जाएंगे।

3.7.2 संस्था प्रधान हेतु प्रशिक्षण

न्यूपा एवं यूकेरी के माध्यम से संस्था प्रधानों के लिए नेतृत्व क्षमता विकास प्रशिक्षण, फील्ड सपोर्ट कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

3.7.3. शिक्षक प्रशिक्षण

नवनियुक्त शिक्षकों हेतु अभिनव प्रशिक्षण एवं सेवारत शिक्षकों हेतु आवश्यकतानुसार विषय आधारित कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगे।

3.8. सराहनीय कार्य करने वाले संस्थाप्रधानों/शिक्षकों/भामाशाहों / दानदाताओं को प्रोत्साहन

3.8.1 प्रत्येक विद्यालय / ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित 26 जनवरी / 15 अगस्त के कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा।

3.8.2 प्रत्येक पंचायत समिति में सर्वश्रेष्ठ आदर्श विद्यालय के संस्था प्रधान को उपखंड स्तर पर आयोजित 26 जनवरी / 15 अगस्त के कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।

3.8.3  प्रत्येक जिले में तीन सर्वश्रेष्ठ आदर्श विद्यालयों के संस्थाप्रधानों को 26 जनवरी / 15 अगस्त के जिला स्तरीय कार्यक्रमों में सम्मानित किया जाएगा।

3.8.4  शिक्षा संकुल में आयोजित राज्य स्तरीय 26 जनवरी / 15 अगस्त के समारोह में राज्य के 5 सर्वश्रेष्ठ आदर्श विद्यालयों के संस्था प्रधानों को सम्मानित किया जाएगा।

3.8.5 सर्वश्रेष्ठ आदर्श विद्यालय का चयन विद्यालय में विकसित की गई सुविधाओं, शिक्षण कार्य की गुणवत्ता, प्रारम्भिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के Learning levels एवं कक्षा 8, 10 एवं 12 के बोर्ड परीक्षा परिणाम के आधार पर किया जाएगा।

3.8.6. पंचायत समिति के सर्वश्रेष्ठ विद्यालय का चयन संबंधित प्रभारी अधिकारी द्वारा जिला स्तरीय सम्मान हेतु विद्यालय का चयन जिला कलेक्टर द्वारा (संबंधित प्रभारी अधिकारी की अनुशंसा पर) तथा राज्य स्तरीय पुरस्कार हेतु चयन आयुक्त, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा ( संबंधित जिला कलक्टर की अनुशंसा पर) किया जाएगा।

3.8.7 राज्य स्तर पर भामाशाहों / दानदाताओं को सम्मानित करने हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसी प्रकार जिला स्तर पर भी दानदाताओं / भामाशाहों को जिला स्तरीय कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। इस हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश निदेशक, माध्यमिक / प्रारम्भिक शिक्षा द्वारा जारी किए गए हैं परिशिष्ट- 13।

3.8.8 उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान योजना के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसी प्रकार जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित कर, उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया जाएगा। इस हेतु दिशा-निर्देश निदेशक माध्यमिक शिक्षा द्वारा जारी किए गए हैं परिशिष्ट-14।

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