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संतुलित भोजन (Balanced Diet)

संतुलित भोजन (Balanced Diet)- भोजन आहार प्रत्येक मनुष्य की पहली आवश्यकता है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग जलवायु में रहने वाले लोगों के भोजन की सामग्री अलग-अलग हो सकती है । लेकिन भोजन के आवश्यक तत्व तथा कुछ आवश्यक जानकारियां और दिशा -निर्देश सबके साथ एक जैसें ही होते हैं ।

हालांकि शिशु प्रौढ व बुड़ढें तथा साधारण महिला व गर्भवती महिला सामान्य कार्य करने वाले व्यक्ति व विशेष कार्य करने वाले व्यक्ति व बीमार व्यक्ति के भोजन की मात्रा, सगय व भोजन के तत्वों में कौनसा तत्व अधिक हो या कम हो आदि बातों में भिन्नता हो सकती है।

हमारा मानव शरीर हमेशा स्वस्थ रहें इसके लिये पहली आवश्यकता है भोजन, दूसरी आवश्यकता है नींद या आराम और स्वस्था रहने के लिये तीसरी महत्वपूर्ण आवश्यकता है, व्यायाम या योग।

हमारे शास्त्रों में शरीर को पाँच तत्वों रो निर्मित माना है उनमें पृथ्वी, वायु, जल, अग्नि और आकाश तत्व शामिल है। अतः शरीर के पोषण के लिये इन पाँचों तत्वों का अंश किसी ना किसी रूप में हमारे शरीर के लिये आवश्यक है।

मानव शरीर एक स्वचालित मशीन की तरह है। जिस प्रकार एक मशीन और उराके विभिन्न पुर्जे और कार्यशैली होती है। ठीक उसी प्रकार शरीर एक पुर्जे युक्त जिन्दा मशीन है । जिस प्रकार मशीन को संचालित करने के लिए किसी ना किसी तरह की ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं. शरीर के लिए भी वही आवश्यकता होती है। मानव कलपुर्जो, कोशिकाओं, ऊतकों की टूट फूट को ठीक करने आदि के लिये हमें भोजन की आवश्यकता होती है। यहां हम मुख्य रूप से भोजन के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगें। हमारे भोजन मे कौन कौन से तत्व होने चाहिये जो हमारे शरीर को आवश्यकताओ को पूरा कर सकें। संतुलित भोजन (Balanced Diet) के पोषक तत्व हनारे भोजन में निम्न लिखित रासायनिक तत्वों का होना जरूरी है जो हमारे शरीर की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकें।

कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)-संतुलित भोजन (Balanced Diet) में कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) का महत्वपूर्ण स्थान है। कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर को गर्मी एवं शक्ति प्रदान करता है। शरीर की वृद्धि में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह हाइड्रोजन व ऑक्सीजन तत्वों का संगठन है। अत्यधिक परिश्रग करने बाले लोगों को इसकी अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है, इसमें हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के तत्वों का अनुपात 2:1 होता है। ये मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं :-

1- शर्करा (Sugar)- यह मीठे फलों से गन्ने खजूर, चुकन्दर, शक्कर में मिलती है तथा जल में घुलनशील है।

2- स्टार्च Starch – यह आलू, चावल व गेहूँ में ज्यादा मिलता है, ये जल में घुलनशील नहीं है।

3- सेल्यूलोज (Cellulose)- यह फलों एवं सब्जियों से प्राप्त होता है तथा जल में अधुनशील हैं। हमारी पाचन क्रिया प्रणाली इन्हे ग्लूकोज में परिवर्तित करके शरीर में खपा लेती हैं कार्बोहाइड्रेट को भली भांति पचाने के लिए विटामिन B की आवश्यकता होती है। कॉर्बोहाइड्रेट शरीर के ताप को नियंत्रित करता है।

वसा- वसा हमें कार्बोहाइड्रेट रो दुगनी ऊर्जा एवं उष्णा देती है। इसी कारण ठण्डें प्रदेश के निवासियों के आहार में वसा की मात्रा अधिक होती है। वसा के मुख्य स्रोत वनस्पतियों व जन्तुओं से प्राप्त भोज्य पदार्थ है। जन्तुओं से वसा, दूध, घी, मक्खन, मछली तेल आदि से प्राप्त होती है । वनस्पतियों में मूंगफली, तिल, सरसों, नारियल आदि के तेल, बादाम, अखरोट एवं काजू से प्राप्त होती है। वसा की अत्यधिक कमी से दाद, खुजली व चर्मरोग हो सकते है तथा वसा की ज्यादा मात्रा भी शरीर के लिए हानिकारक हो सकती हैं। मोटापे की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे कई तरह के घातक रोग होने की सम्भावना हो सकती है। जिसमें रक्त चाप व दिल की बीमारियां मुख्य हैं अतः 40-45 की आयु के बाद वरायुक्त पदार्थों को अपने भोजन में नहीं होना चाहिए या कम लेना चाहिए । संतुलित भोजन (Balanced Diet) में वसा का महत्वपूर्ण स्थान है।

प्रोटीन्स-संतुलित भोजन (Balanced Diet) में प्रोटीन्स का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रोटीन से हमे ऊर्जा मिलती है। तथा इसे तंतू उत्पादक तत्व कहा जाता है हमारे शरीर में असंख्य कोशिकाओं का समूह है। और यह पूरा समूह प्रोटीन्स का बना होता है। प्रोटीन टुटे फुटे उत्तकों की मरम्मत करता है। हारमोन्स का उत्पादन भी काफी हद तक प्रोटीन के माध्यम से होता है। प्रोटीन का निर्माण 16 अमलौं के द्वारा होता हैं। प्रोटीन में गुख्यत कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, गंक एंव फास्फोरस नामक तत्व पाये जाते है। नाईट्रोजन इसका मुख्य संघटक होता है। प्रोटीन भोजन का एक भाग या तत्व है यह शरीर की रोगों से रक्षा करता है। इस तत्व की कमी से एनिमिया, रूधिर की कमी, वजन घटना, पैरो में सूजन आदि रोग हो जाते है । तथा किडनी एवं यकृत के रोग होने की समस्या भी बढ़ जाती है।

प्रोटीन मुख्य रूप से हमें दूध, अंडा, गेंहू, जौं, बाजरा, चना, आदि अनाजों, सूखे मेवों एवं सभी प्रकार की दालों और हरी सब्जियों में मिलता है। शरीर में आवश्यकता से अधिक प्रोटीन की मात्र पहुचाने पर शरीर उन्हें वसा यानी चर्बी में बदल देता है । जिससे शरीर में मोटापा बढ़ता है।

विटामिन – विटामिन शरीर में सीधे न तो शक्ति प्रदान करते हैं न ही सीधे वृद्धि में सहायक होते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इनका हमारे शरीर के लिये कोई महत्व नहीं है। भोजन में यदि विटामिन्स की मात्रा पर्याप्त नहीं हो तो शरीर अनेक रोगों से प्रभावित हो जाता है। यदि संतुलित भोजन (Balanced Diet) में विटामिन नहीं हो तो उन खाद्य पदार्थों का कोई महत्व नहीं रह जाता विभिन्न प्रकार के विटामिन्स की कमी से अनेकों प्रकार के रोग शरीर मे हो जाते हैं। लेकिन उससे सम्बन्धित विटामिन्स लेने से बे रोग ठीक भी हो जाते हैं। विटामिन मुख्य रूप से छ: प्रकार के होते हैं। संतुलित भोजन (Balanced Diet) में विटामिन का महत्वपूर्ण स्थान है।

विटामिन A (कैरोटीन)– यह मुख्यतः दूध, अण्डा, मक्खन, पनीर, यकृत और मछली के तेल में पाया जाता है यह साग सब्जियों (मुख्यतः गाजर) में कैरोटीन के रूप में पाया जाता है। विटामिन । की कमी से रतौंधी, आँखो में खुजली, गुर्दे में पथरी आदि रोग हो जाते है ।

विटामिन B (काम्बलैक्स)– इसमे कई विटामिन सम्मिलित है जो हमारे शरीर के संचालन में बहुत मदद करते है।

विटामिन B-1 (थायमिन )– इसका प्रभाव तंत्रिका तंत्र व हृदय पर अधिक होता है इसकी कमी से बेरी-बेरी नामक रोग हो जाता है। भूख की कमी व थकान इसी विटामिन की कमी से होती है। यह मुख्यतः दाल, हरी सब्जी, मांस, दूध, अण्डा, मूंगफली आदि में पाया जाता है।

विटामिन B-2 (राबो फलेबिन)-यह मुख्यतः दूध, अण्डा, सोयाबीन, मछली अनाज व दालों में पाया जाता है। राइबोलेबिन इरका रासायनिक नाम है जो आक्सोडेरान क्रिया में बहुत सहायोगी होता है । इसकी कमी से होठ फटना, चर्मरोग आदि बीमारी हो जाती है। निकोटिनिल अम्ल (नियासिन) यह भी B काम्पलेस ग्रुप सदस्य विटामिन है यह मुख्यतः दूध और- अनाज में पाया जाता है। इसका मुख्य कार्य प्रोटीन वसा और कार्बोहाइट्रेट के चयापचय में सहायक करता होता है। इसकी कमी से पे लाग्रा रोग हो जाता है।

फोलिक अम्ल (नियासिन ) यह भी B काम्पलैक्स ग्रुप का सदस्य है तथा इसका मुख्य कार्य लाल एंव सफेद कोशिकाओं को बनाने में सहायक होता है। यह आंतो में बनता है तथा मुख्यतः हरी सब्जियों, अनाज और मांस में पाया जाता है इस की कमी से वृहत लोहित कोशिका अरक्तता (Macrocytic Anaemia) रोग हो जाता है।

विटामिन B-12 (साइनो कोबालमिन)– यह मुख्यतः मांस व अंडो में पाया जाता है । इसका मुख्य कार्य लाल कोशिकाओं का निर्माण करना होता है इस की कमी से एनीमिया रोग हो जाता है ।

विटामिन C (एस्कोर्बिन अम्ल) यह विटामिन ताजे फल एवं सब्जियों में पाया जाता हैं। मुख्यत खट्टे फलों सन्तरा, नींबू, टमाटर, आँवला, हरी मिर्च एवं अमरूद आदि में अधिक पाया जाता है। इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित है-
1- यह टूटी हड्डियों को जोड़ने में मदद करता है।
2- घाव जल्दी भरने में मदद करता है।
3- दांतो एवं हड्डियों को मजबूती देता है
4- रक्त वाहिनीयों की दीवार मजबूत करता है ।
5 संक्रामक रोगों से संरक्षण करता है।

विटामिन E (टेको फिरोल)– यह विटामिन मुख्यतः अण्डा, अंकुरित और कपास के तेल में अधिक मात्रा में पाया जाता है इसकी कमी से “प्रजनन” सम्बन्धित रोग हो जाते हैं। यह गर्भपात एवं पेचिरा की बीमारी के बचाव व रोकथाम के लिए जरूरी है।

विटामिन K -(नेप्थेक्यूनोन)– यह विटामिन मुख्यतः हरी सब्जियों एवं पत्तेदार तरकारियों में पाया जाता है, पालक, बन्दगोभी, गाजर, मटर आदि इसके प्रमुख स्रोत हैं इसकी कमी से “हेमरेज” रोग होने की सम्भावना होती है।

खनिज लवण– संतुलित भोजन (Balanced Diet) में प्रोटीन के बाद खनिज लवण मानव शरीर निर्माण में महत्वपूर्ण रासायनिक तत्व है। हमारे शरीर में लगभग 2 तरह के लवण पायें जाते हैं। ये हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। ये भी प्रोटीन की तरह खर्च होते रहते हैं। इसलिये शरीर के द्वारा इनकी पूर्ति होना जरूरी होता है खनिज, शरीर द्रव को संतुलित रखते है। ये उन्हे न तो अम्लीय होने देते है और न ही क्षारीय होने देते है। खनिजों से रक्त एवं हडडियों को लाभ पहुंचाता है। लवण से कई प्रकार के खनिज पदार्थ मिलते हैं – लोहा, कॉल्सयम, फारफोरस, आयोडीन आदि । ये सभी शरीर के निर्माण, संचालन में, हडडियों की मजबूती में, रक्त की पूर्ति एवं संचरण में, रक्त को साफ रखने में. मांसपेशियों और तंतुओं तक ऑक्सीजन पहुचाने में ये रक्त की सहायता करते है। प्रति दिन मनुष्य को 20 से 30 मिली ग्राम लौह तत्व की आवश्यकता होती है। खनिज लवणों में प्रमुख रूप से निम्न होते है ।

(1) कैल्सियम और फास्फोरस– ये हड़ियों और दाँतो के लिये उपयोगी है उन्हें ठीक रखने में सहायक होते हैं। शरीर का 44 प्रतिशत कैल्सियम हड्डियों और दाँतो की सुरक्षा में खर्च हो जाता है। ये दोनो नाडी व घेशियो को भी सुचारू रखने में मदद करते है – विटामिन “डी” इनका सहायक होता है। इन की कमी से दॉत और हड्डियों के रोग हो जाते है। कैल्सियम मुख्यतः दूध खोया तिल और बादाम में मिलता है। तथा फासफोरस अण्डा मछली दाल एवं दूध से मिलता है ।

(2) लौहा– सारे शरीर में रक्त एवं रक्त सम्बधी समस्या कार्यो में लोहा मदद करता है लोहा मुख्यतः हीमोग्लोबिन में रहता है। भोजन में लोहे की कमी से एनीमिया नामक रोग हो जाता है। लोहा मुख्यतः बाजरा, ज्वार, मटर, सोयाबीन, आलू, पालक, धनिया, करेला, अण्डा आदि में पाया जाता है।

(3) आयोडीन-शरीर में सबसे ज्यादा आयोडीन का संचय थायराइड ग्रन्थि में रहता है। यह ग्रन्थि थायरॉक्सिन किया में भाग लेती है। आयोडीन की कमी से घेंघा रोग हो जाता है यह रोग अधिकतर पहाड़ी लोगो को होता है। इसकी कमी को पूरा करने के लिये भोजन में आयोडीन युक्त नमक लेना चाहिए।

(4) सोडियम क्लोराइड-इसे साधारण नमक भी कहा जाता है। शरीर में इसकी मात्रा अन्य लवणों से अधिक होती है। यह हर उत्तक तरल में रहकर उत्तकों की क्रिया को सुचारू बनाता है। आमाशय में बनने वाले हाइड्रो क्लोरिक अम्ल के निर्माण में भी भाग लेता है। हमारे भोजन में इसकी पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए।

(5) पौटेशियम-इसकी कमी से अनिद्रा, कब्ज और घबराहट हो जाती है। यह सब्जियों एवं सम्पूर्ण खाद्यानों में पाया जाता है।

जल (Water)-मानव शरीर का 90 प्रतिशत हिस्सा जल द्वारा निर्मित होता है। जल ही जीवन है, जल मानव शरीर की भोजन से भी पहली प्राथमिकता है इसके बिना जीवन सम्भव नही है। भोजन को पचान, रक्त के लिए तथा शरीर से अवशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने हेतु जल की आवश्यकता होती है, हमें हमेशा शुद्ध जल का सेवन करना चाहिए तथा पर्याप्त मात्रा में जल का सेवन करना चाहिए ।

कैलोरी- कैलौरी शरीर की शक्ति मापक ईकाई है। व्यक्ति की शारीरिक क्रियाओं उम्र, लिंग, जलवायु व अन्य कई परिस्थियों के आधार पर हम अनुमान लगा सकते है कि हमेंसंतुलित भोजन (Balanced Diet) से कितनी कैलोरी ऊर्जा प्राप्त हो रही हैं तथा कितनी कैलोरी की आवश्यकता है। सामान्यता एवं दिन में मुनष्य को निम्नलिखित कैलौरी मात्रा की आवश्यकता पड़ती है-

वर्गआवश्यकता कैलौरी प्रतिदिन
एक से पाँच वर्ष का बच्चा1100 से 1300 कैलोरी
5 से 10 वर्ष तक1300 रो 1500 कैलोरी
10 से 15 वर्ष तक1500 से 1800 कैलोरी
15 से 20 वर्ष (लड़की)1400 से 1700 कैलोरी
15 से 20 वर्ष (लड़को)1600 से 2000 कैलोरी
06 हमेशा बैठे रहने वाले पुरुष के लिए1800 से 2300 कैलोरी
07. हल्का परिश्रम करने वाले पुरूष के लिए2300 से 3000 कैलौरी
08. सामान्य परिश्रम करने वाले पुरूष3000 से 3500 कैलोरी
कठिन परिश्रम करने वाले पुरुष3500 से 4500 कैलोरी
बहुत अधिक परिश्रम करने वाले पुरुष4500 से 6500 कैलोरी
हल्का श्रम करने वाली महिला2000 से 2300 कैलोरी
सामान्य श्रम करने वाली महिला2000 से 2300 कैलोरी
गर्भवती महिला के लिएलगभग 2700 कैलोरी
दूध पिलाने वाली महिला को2700 से 3500 कैलोरी
बहुत अधिक कठिन परिश्रम करने वाली महिला3500 से 4500 कैलौरी

अतः हम कह सकते है कि यदि प्रतिदिन के भोजन में उपर्युक्त पोषक का समुचित अनुपात आवश्यक मात्रा है तो उसे हम संतुलित भोजन (Balanced Diet) कह सकते है । सामान्य परिश्रम करने वाले व्यरक व्यक्ति का सन्तुलित आहार तालिका:

संतुलित भोजन (Balanced Diet) में पोषक तत्वमात्रा
कैलोरी3000
प्रोटीन70 ग्राम
वसा60 ग्राम
कार्बोहाइट्रेड545 ग्राम
कैल्सियम1 ग्राम
लोहा30 मिली ग्राम
विटामिन A5000 अन्तर्राष्ट्रीय यूनिट
विटामिन B1.5 मिग्रा
विटामिन B-11.5 मिग्रा
निकोटिक अम्ल20 मिग्रा
विटामिन C100 मि.ली

उपरोक्त अध्ययन के पश्चात् हम जानना चाहेंगे की संतुलित आहार भोजन कब करना चाहिए तथा कितना करना चाहिए जिससे हम स्वस्थ रह सके तथा शरीर विभिन्न प्रकार की ज्ञातक बिमारियों से दूर रहें।

भोजन करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

हम जानते है कि शरीर की मूलभूत आवश्यकताओं में भोजन सबसे प्राथमिक आवश्यकताओं में से पहली आवश्यकता है, लेकिन इसके लिए भी हमें कुछ आवश्यक जानकारियां रखनी होगी कि हमें भोजन कब-कब करना चाहिए और कब नही । यदि यह ध्यान नही रखा गया तो वही भोजन जो हमारे शरीर के और स्वास्थ्य व जीवन के लिए जरूरी है वह विष का कार्य प्रारम्भ कर देता है ।

भोजन एक बहुत ही पवित्र कर्म है। श्रेष्ठ भोजन वह है जो हित भूख, मित भूख ओर ऋतुभूख हो अर्थात वह भोजन जो शरीर के हित और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया हों वह भोजन जो मित्तव्ययता के साथ किया गया हो तथा वह भोजन जो ऋतु और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया हों वह भोजन श्रेष्ठ भोजन कहलाता है। भोजन कब करे इसके बारे में निम्नांकित तथ्यों पर हमें ध्यान देना चाहिए-

1. भोजन का समय निश्चित होना चाहिए ।

2. प्रातः काल शौचादि से निवृत होकर ही नाश्ता करना चाहिए।

3. कुछ शारीरिक श्रम करने के पश्चात ही दोपहर का भोजन करना चाहिए ।

4. सांयकालीन भोजन सूर्यास्त से पहले ही कर लेना चाहिए।

5. भोजन हमेशा भूख लगने पर ही करना चाहिए।

6. भूख लगना ही भोजन करने का सही समय है।

7. जिन लोगों की पाचन क्रिया मंद है उन्हे निरोगी रहने के लिए केवल एक वक्त ही भोजन करना चाहिए बाकी समय हल्का नाश्ता या दूध या सलाद आदि लेना चाहिए या फलों का रस लेना चाहिए।

8. भोजन हमेशा तनाव रहित होकर स्वच्छ चित्त से करना चाहिए ।

9. भोजन हमेशा प्रार्थना करने के पश्चात ही करना चाहिए। भोजन से पहले उस किसान को

धन्यवाद दें जिसने वह अन्न उगाया, उस प्रकृति को धन्यवाद दें जिसने बारिश व धूप और हवा दी। उस व्यक्ति को धन्यवाद दें. जिसने उस अन्न को बेचा उस व्यक्ति को धन्यवाद दें जिसने वह आम तक पहुंचाया। उस व्यक्ति को धन्यवाद दें जिसने भोजन पकाया । अन्त में ईश्वर को धन्यवाद दें जिसने हमें भूख दी ताकि हम उस अन्न को पाकर संतुष्टी करके तृप्त हुए।

10. भोजन करने से पहले उन सभी पात्रों की साफ सफाई ठीक से होनी चाहिए जिनमें आप भोजन करने वाले है।

11. उस स्थान की साफ सफाई होनी चाहिए जहा बैठ कर आप भोजन करने वाले है ।

12. भोजन करने से पूर्व हाथों की सफाई अच्छी तरह कर लेनी चाहिए तब भोजन करना चाहिए ।

13. भोजन यथा सम्भव जमीन पर आसन पर बैठ कर कर ही करना चाहिए ।

14. भोजन हमेशा ताजा ही करना चाहिए बासा भोजन निषिद्ध है।

15. क्रोध के समय भोजन ग्रहण नहीं करें।

16. भोजन पूरी श्रद्धा और प्रेम भाव से भगवान का प्रसाद समझ कर करें।

17. सत्वोगुणी भोजन ही करना चाहिए।

18. भोजन को ठीक से पका कर ही किया जाना चाहिए। पका हुआ भोजन शीघ्र पच जाता है। पके हुए भोजन में विकृति नहीं होती। पके हुए भोजन में जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। पकाये हुए भोजन में विभिन्नताएं लायी जा सकती है।

19. भोजन में सलाद या कच्ची सब्जियों को काम में लेने से पूर्व अच्छी तरह साफ कर ठीक से धो लेना चाहिए।

20. सब्जियाँ सलाद के काटने से पूर्व हाथों व चाकू के बर्तनो को गी ठीक से साफ कर लेना चाहिए।

21. भोजन हमेशा हाथों को साबुन के साथ ठीक से धोने के पश्चात ही करना चाहिए।

22. जहां तक हो सके भोजन परिवार व ईष्ट मित्रों के साथ मिलजुल कर मिल बांट कर करना चाहिए इससे आपसी प्रेम और विश्वास बढ़ता है ।

23. जब हम किसी का अन्न ग्रहण करते है तो हमारा मन भी कुछ-कुछ उस व्यक्ति जैसा हो जाता है अर्थात् उस व्यक्ति या परिवार के प्रति हमारा प्रेम बढ़ जाता है।

इसलिए कहा भी है:- जैसा खाये अन्न वैसा होवें मन, जैसा पीये पानी, वैसी बोले वाणी । अर्थात् हमें अन्न भी सोच समझकर ग्रहण करना चाहिए भोजन की प्रकृति पर भी ध्यान देना चाहिए, भोजन हमेशा सात्विक ही लेना चाहिए।

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट होता है कि हमें भोजन कब खाना चाहिए। भोजन की मात्रा को ठीक से समझने के लिए हमें निम्न तालिका को ठीक से समझना होगा हमने उपर व्यक्ति को एक दिन में कितनी कैलौरी ऊर्जा चाहिए तालिका के माध्यम से जाना तथा यह भी जाना कि विभिन्न आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए कितनी कैलोरी चाहिए। यहां हम आहार के तत्वों में कैलौरीज़ का अध्ययन करेगें।

1 ग्राम प्रोटीन4.1 कैलोरीज
2 ग्राम कार्बोहाइट्रेड4.1 कैलोरीज
1 ग्राम वसा9.3 कैलोरीज

कार्य के अनुसार कैलोरीज का व्यय

काम का प्रकारप्रति घंटा कैलोरी का व्यय
बैठे रहने में100 कैलोरीज
खड़े रहने में105 कैलोरीज
धीरे चलने में200 कैलोरीज
दौड़ने में570 कैलोरीज
टाइप करने में140 कैलोरीज
बढ़ई का कार्य करने में250 कैलोरीज
पत्थरों को तोड़ने में250 कैलोरीज
सामान्य व्यायाम में500 कैलोरीज
लॉन टेनिस खेल में (सिंगल्स)450 कैलोरीज
नृत्य (तेज)350 कैलोरीज
तैरने में (मध्यम गति से)450 कैलोरीज
जागिंग (5 मील प्रति घंटा)500 कैलोरीज
साइक्लिग 13 मील प्रति घंटा650 कैलोरीज

इस तालिका की सहायता से हम समझ सकते है कि हमें कार्य के हिसाब से कितनी कैलौरी युक्त संतुलित भोजन (Balanced Diet) की आवश्यकता है।