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मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना

मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना-मानव के जीवन निर्वाह के लिए आवास बुनियादी जरूरतों में से एक है। एक साधारण नागरिक के लिए आवास उपलब्ध होने से महत्वपूर्ण आर्थिक सुरक्षा और सामाज में प्रतिष्ठा मिलती है। एक बेघर व्यक्ति को आवास उपलब्ध हो जाने से उसके अस्तित्व सामाजिक परिवर्तन आता है तथा उसकी पहचान बनती है और इस प्रकार, वह शीघ्र ही अपने सामाजिक वातावरण से जुड़ जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब लोगों को आवास उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार को सौंपी गई है। भारत सरकार द्वारा सम्पूर्ण देश में 1 जनवरी, 1996 से एक स्वतंत्र योजना के रूप में “इन्दिरा आवास योजना को कियान्वित कराया जा रहा है। भारत सरकार के निर्देशों से राज्य के ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक जिले में बीपीएल सेन्सस- 2002 में चयनित परिवारों में से आवासहीन (“0” कोड) के 215550 परिवारों एवं कच्चे आवास (“1” कोड) के 1570151 परिवारों की इस प्रकार कुल 1785701 परिवारों की एक स्थाई प्रतीक्षा सूची बनाई गई, जिसे “इंदिरा आवास की स्थाई प्रतीक्षा सूची” कहा गया है अर्थात् राज्य के कुल 1785701 बीपीएल परिवारों को इंदिरा आवास की आवश्यकता का आंकलन किया गया।

जिलों में ऐसे बीपीएल परिवार जिनका नाम किन्हीं कारणों से बीपीएल की चयनित सूची में जोड़ने से रह गया है, ऐसे परिवारों हेतु राज्य के प्रत्येक जिले में एक सतत् प्रक्रिया जारी है, जिसके अंतर्गत उपखण्ड अधिकारी को अपील प्रस्तुत कर नाम जुडवाने हेतु आवेदन किया है। पात्रता होने पर उस परिवार का नाम चयनित बीपीएल सूची – 2002 में सम्मिलित कर लिया जाता है। इस सम्बन्ध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी पूर्व में निर्णय पारित किया जा चुका है।

इंदिरा आवास की उक्त स्थाई प्रतीक्षा सूची के 1785701 परिवारों में से गत वर्षों में लाभान्वित किये जाने के पश्चात् दिनांक 01.04.2010 को 14,48,000 परिवार लाभान्वित होने से शेष रह जाते है । इंदिरा आवास योजना में भारत सरकार से प्रतिवर्ष राज्य को मिलने वाले लक्ष्यों से आवासों की पूर्ति करने में लगभग 20-21 वर्ष लगने का अनुमान है।

राज्य के ग्रामीण क्षेत्र के चयनित बीपीएल परिवारों में आवासों की उक्त कमी पर राज्य मंत्री परिषद् की बैठक (चिंतन शिविर) दिनांक 30.11.2009 एवं 01.12.2009 में चिन्तन व मंथन कर आगामी वर्षों में आवासों की कमी को कम करने का निर्णय लिया गया। ग्रामीण आवास के क्षेत्र में कार्य की महत्ता को देखते हुए ऐसा अनुभव किया गया है कि एक व्यापक योजना को लाकर इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों को समर्थन देना आवश्यक है तथा ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों के लिए आवासों की कमी को कम करना अति आवश्यक है। राज्य में ग्रामीण बीपीएल आवासों की लम्बित मांग को ध्यान में रखते हुए इन्दिरा आवास योजना की तर्ज पर राजस्थान विधानसभा में माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा प्रस्तुत बजट 2011-12 के बजट भाषण में इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना लागू करने की घोषणा की है। यह योजना राज्य में 2011-12 से 2013-14 तक लागू रहेगी। इस प्रकार योजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में लगभग 6 लाख 80 हजार ग्रामीण बीपीएल परिवारों को आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा

“मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना”

” इन्दिरा आवास योजना” की तर्ज पर “मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना पूरे राज्य के ग्रामीण क्षेत्र में क्रियान्वित कराई जायेगी। राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में आवास उपलब्ध कराने की यह एक प्रमुख योजना है। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित “इन्दिरा आवास योजना की क्रियान्विति भी राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व की भांति चालू रहेगी।

उद्धेश्य

योजना का मुख्य उद्धेश्य अनुसूचितजाति / अनुसूचित जनजाति, मुक्त बंधुआ मजदूरों के सदस्यों, अल्पसंख्यकों एवं गैर अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के गरीबी रेखा के नीचे के ग्रामीण परिवारों को इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर वित्तीय सहायता देकर नवीन आवासीय इकाईयों के निर्माण में मदद करना है ।

वित्त पोषण प्रणाली

इस योजना के वित्त पोषण हेतु जिला परिषदों द्वारा हुडको (HUDCO) से ऋण लिया जायेगा, परन्तु लाभार्थी को यह राशि नवीन आवास निर्माण हेतु अनुदान सहायता के रूप में “इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर उपलब्ध कराई जाएगी। HUDCO द्वारा जिला परिषदों को इस आवासीय योजना में उपलब्ध कराये जाने वाले ऋण की ब्याज दर Floating रहेगी। ऋण का पुर्नभुगतान HUDCO द्वारा निर्धारित किश्तों में निर्धारित अवधि में सम्बन्धित जिला परिषद् द्वारा किया जायेगा।

राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर पंचायती राज संस्थाओं को उपलब्ध कराये जाने वाली अनुदान सहायता से ऋण का पुर्नभुगतान प्राथमिकता पर जिला परिषद् द्वारा किया जायेगा। अनुदान सहायता का तात्पर्य है कि पंचायती राज संस्थाओं के स्वयं के संसाधनों एवं राज्य सरकार से SFC, TFC, Untied funds आदि में दी जा रही अनुदान सहायता के अलावा राज्य सरकार की अतिरिक्त अनुदान सहायता हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि HUDCO से प्राप्त ऋण से जिला परिषद् द्वारा लाभार्थी को इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर आवासीय सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। HUDCO से लिये गये ऋण के पुर्नभुगतान का दायित्व जिला परिषद् का ही रहेगा, न कि लाभार्थी का वित्त विभाग द्वारा हुडको (HUDCO) को काउण्टर गारण्टी दी जावेगी एवं इस ऋण के पुर्नभुगतान हेतु जिला परिषद् द्वारा हुडको (HUDCO) के साथ ESCROW Account का संधारण किया जायेगा जिससे कि ऋण की किश्त का समयबद्ध भुगतान किया जा सके।

जिला परिषद् द्वारा HUDCO से ऋण लेने, ऋण के पुर्नभुगतान समय पर करने एवं पुर्नभुगतान हेतु राज्य के वित्त विभाग से अनुदान समय से प्राप्त करने से सम्बन्धित समस्त कार्यवाही पंचायती राज विभाग की देखरेख में सम्पादित की जावेगी। राज्य स्तर पर वित्तीय प्रबन्धन से सम्बन्धित समस्त कार्यवाही के लिए पंचायती राज विभाग नोडल विभाग होगा।

प्रशासनिक व्यय

“मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना अंतर्गत आगामी 3 वर्षो में ₹ 3400 करोड व्यय होने का अनुमान हैं। उक्त योजना के क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर, जिला परिषद् स्तर एवं पंचायत समिति स्तर पर अतिरिक्त कार्मिकों की एवं संसाधनों की आवश्यकता रहेगी, अतः कुल योजना लागत पर 3 प्रतिशत प्रशासनिक एवं सुपरविजन व्यय के रूप में राशि का प्रावधान राज्यमद / HUDCO ऋण से किया जा रहा हैं।

लक्षित समूह

योजनान्तर्गत आवासों के लिए लक्षित समूह अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, मुक्त बंधुआ मजदूरों के सदस्यों, अल्पसंख्यकों एवं गैर अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले ग्रामीण परिवार, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युद्ध में मारे गये सशस्त्र / अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों की विधवाएं तथा सम्बन्धियों ( उनके आय मानदण्ड पर ध्यान दिये बिना), अन्य शर्तों को पूरा करने वाले भूतपूर्व सैनिक और अर्द्ध सैनिक बलों के सेवानिवृत्त सदस्य हैं।

अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक व विकलांग लाभार्थियों के लिए निधियों का निर्धारण

(i) एक वित्तीय वर्ष के दौरान योजना के कुल आवंटन का कम से कम 60 प्रतिशत गरीबी की रेखा से नीचे के चिन्हित पात्र अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के परिवारों के लिए नवीन आवासीय इकाईयों के निर्माण के लिए प्रयुक्त किया जाना चाहिए

(ii) गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले चिन्हित पात्र गैर-अनुसूचित जाति / जनजाति (सामान्य + ओबीसी + अल्पसंख्यक) के परिवारों के लिए अधिकतम 40 प्रतिशत ।

(iii) योजनान्तर्गत निर्धारित लक्ष्य एवं निधियां का 15 प्रतिशत अल्पसंख्यकों हेतु निर्धारित किया जाये जि के कुल लक्ष्यों में से 15 प्रतिशत लक्ष्य अल्पसंख्यकों हेतु जिला स्तर पर रखे जावे एवं इनका आवंटन ग्राम पंचायतवार पात्र अल्पसंख्यक परिवारों की उपलब्धतता के अनुपात में जिला परिषद् स्तर से किया जावे | अल्पसंख्यकों को लाभान्वित करने हेतु अन्य (सामान्य + ओबीसी + अल्पसंख्यक) वर्ग की स्थाई प्रतीक्षा सूची में वरीयता के अतिक्रमण में लाभांवित किया जाना है। राज्य में “मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य का 15 प्रतिशत लक्ष्य लक्षित समूह के अंतर्गत आने वाले अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित है एवं इन लक्ष्यों को राज्य स्तर पर आरक्षित कर आवश्यकतानुसार इनका अंतर्जिला आवंटन राज्य सरकार द्वारा किया जा सकेगा।

नोट :- राज्य में पात्र अल्पसंख्यक हेतु मुस्लिम, इसाई, सिख, बौद्ध एवं पारसी धर्म के लोगों को अल्पसंख्यक माना गया हैं।

(iv) शारीरिक एवं मानसिक रूप से अपंग व्यक्तियों के लिए 3 प्रतिशत प्रत्येक वर्ग के कुल लक्ष्यों में से 3 प्रतिशत लक्ष्य विकलांगों हेतु रखे जावे । विकलांगों को लाभान्वित करने हेतु स्थाई प्रतीक्षा सूची में वरीयता की अनदेखी करके सर्वोच्च प्राथमिकता देकर लाभान्वित कराया जावे।

1.7 योजना के कार्यान्वयन के लिए कार्य-नीति

“मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना” को जिला परिषदों के जरिये इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर कार्यान्वित किया जायेगा तथा नवीन आवासों का निर्माण स्वयं लाभार्थियों द्वारा किया जायेगा ।

लाभार्थियों की पहचान तथा चयन एवं पात्रता

मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना- लाभार्थियों का चयन इंदिरा आवास की प्रतीक्षा सूची से कराना एवं पात्रता –

 बीपीएल सेन्सस – 2002 के आधार पर चयनित बीपीएल परिवारों में से इंदिरा आवास के लिए तैयार की गई वर्गवार स्थाई प्रतीक्षा सूची में से पंचायतवार लाभार्थियों के चयन के लिए प्रत्येक वर्ग में प्रथम प्राथमिकता आवासहीन (0′ कोड) के परिवार को दिया जाये। ग्राम पंचायत में उस वर्ग विशेष में आवासहीन (‘0′ कोड) के पात्र लाभार्थी उपलब्ध नहीं होने पर ही उसी वर्ग विशेष के कच्चे आवासों (1’ कोड) के परिवारों में से वरीयता क्रम में लाभार्थी का चयन निर्धारित लक्ष्यों की सीमा में किया जाये ।

प्रत्येक जिले में ग्रामीण क्षेत्र के बीपीएल सेन्सस- 2002 के आधार पर चयनित बीपीएल परिवारों की इंदिरा आवास हेतु 2 स्थाई प्रतीक्षा सूची तैयार की गई है। एक सूची अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के परिवारों हेतु तथा दूसरी सूची अन्य (सामान्य + ओबीसी + अल्पसंख्यक) वर्ग के परिवारों हेतु तैयार की गई हैं। उक्त दोनों स्थाई प्रतीक्षा सूचियां बीपीएल सेन्सस 2002 के प्राप्तांकों की वरीयता क्रम में आवासहीन (“0 कोड) एवं कच्चे आवास (“1 कोड) के क्रम में तैयार की गई है। जिनका ग्राम सभाओं में भी अनुमोदन हो चुका हैं। इन प्रतीक्षा सूचियों की वरीयता कम में लाभार्थियों का चयन किया जाना हैं। स्थाई प्रतीक्षा सूची के ऐसे परिवार जिनके पास पक्का मकान नहीं हो तथा पूर्व में किसी आवासीय योजना में लाभान्वित नहीं हो, को ही पात्र माना जायेगा ।

उक्त प्रतीक्षा सूचियों का प्रकाशन पंचायत भवन की दीवारों पर पेन्ट से प्रदर्शित करवाया है। स्थाई प्रतीक्षा सूचियों को प्रतिवर्ष अपटेड करवाने, इनकी प्रतियां ग्राम पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद् स्तर पर रखवाने का दायित्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद् का हैं। यह दोनों स्थाई प्रतीक्षा सूचियां विभाग की web-site www.rdprd.gov.in पर भी प्रदर्शित की हुई हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की पालना में उपखण्ड अधिकारी के स्तर से अपील के माध्यम से बीपीएल परिवारों में नाम जुडने / घटने के फलस्वरूप समय-समय पर इंदिरा आवास की स्थाई प्रतीक्षा सूची में भी पात्रता के अनुसार परिवारों के नाम जुडते / घटते रहते हैं जिसे समय-समय पर NIC द्वारा वेब साइट पर अपटेड किया जाता हैं।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना- अल्पसंख्यकों के चयन में वरीयता की छूट एवं अलग स्थाई प्रतीक्षा सूची तैयार करना

अन्य (सामान्य + ओबीसी + अल्पसंख्यक) वर्ग के परिवारों हेतु तैयार की गई सामूहिक स्थाई प्रतीक्षा सूची में अल्पसंख्यकों को वरीयता में छूट, लक्ष्यों की सीमा तक रहेगी। इस सामुहिक स्थाई प्रतीक्षा सूची में से लाभान्वित होने से शेष रहे पात्र अल्पसंख्यकों की अलग सूची उनके वरीयता क्रम में ग्राम पंचायतवार तैयार कराई जावें। इस प्रकार जिले में ग्राम पंचायतवार उपलब्ध पात्र अल्पसंख्यकों के अनुपात में जिला परिषद् स्तर से अल्पसंख्यकों का लक्ष्य सम्बन्धित ग्राम पंचायतवार निर्धारण करने के पश्चात् अल्पसंख्यकों को उनकी वरीयता क्रम में लाभान्वित कराया जावे। अगर जिले में अल्पसंख्यकों के लिए निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के लिए जिले की स्थाई प्रतीक्षा सूची में आवासहीन (“0″कोड) एवं कच्चे आवास (“1″कोड) में कोई भी पात्र अल्पसंख्यक लाभान्वित होने से शेष नहीं रहता है तो इसका प्रमाण पत्र विभाग को प्रेषित कर दिया जाये परन्तु इनके स्थान पर राज्य सरकार की पूर्वानुमति के बगैर किसी अन्य को लाभांवित नहीं किया जाये।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना-पात्र विकलांगों को वरीयता की छूट एवं अलग स्थाई प्रतीक्षा सूची तैयार करना-

बीपीएल सेन्सस- 2002 के आधार पर जो स्थाई प्रतीक्षा सूचियां तैयार की गई है, उक्त स्थाई प्रतीक्षा सूचियों में प्रत्येक वर्ग में वरीयता में छूट देकर सर्वोच्च प्राथमिकता से पात्र विकलांगों को लाभान्वित किया जावे । स्थाई प्रतीक्षा सूचियों में से विकलांग परिवारों की सूची अलग से वरीयता के क्रम में तैयार की जावे । प्रत्येक वर्ग की स्थाई प्रतीक्षा सूचियों के परिवारों में से किसी भी पात्र विकलांग व्यक्ति को लाभान्वित करने हेतु वरीयता की अनदेखी करते हुए सर्वोच्च प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक पात्र विकलांग व्यक्तियों ( जिले की कुल उपलब्ध राशि के तीन प्रतिशत तक) को लाभान्वित किया जाना हैं। अगर आपके जिले में प्रत्येक वर्ग में आवासहीनों (“0” कोड) एवं कच्चे आवास (“1” कोड) की स्थाई प्रतीक्षा सूची में कोई भी पात्र विकलांग व्यक्ति लाभान्वित होने से वंचित नहीं रहता तो इसका प्रमाण पत्र विभाग को प्रेषित करें।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना- लाभार्थियों के चयन में प्राथमिकता

लाभार्थियों के चयन के लिए प्राथमिकता का कम इस प्रकार है :
(i) मुक्त बंधुवा मजदूर ।
(ii) अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति परिवार
• अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति परिवार, जो अत्याचारों से पीड़ित हैं।
• अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति परिवार, जिनकी मुखिया विधवाएं तथा अविवाहित महिलाएं हैं।
• अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति परिवार जो बाढ़, भूकम्प, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं तथा मनुष्य द्वारा उत्पन्न आपदाओं जैसे- दंगें से पीड़ित हैं।
• अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के अन्य परिवार ।

(iii) कार्यवाही के दौरान मारे गये रक्षा / अर्द्ध सैनिक बलों के कर्मचारियों की विधवायें / परिवार ।
(iv) गैर अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति परिवार |
(v) शारीरिक तथा मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति |
(vi) अर्द्ध सैनिक बलों के भूतपूर्व तथा सेवानिवृत्त कर्मचारी |
(vii) विकासात्मक परियोजना के कारण विस्थापित व्यक्ति, खानाबदोश / अर्द्ध खानाबदोश तथा निर्दिष्ट आदिवासी, शारीरिक / मानसिक अपंग सदस्यों वाले परिवार ।

लाभार्थियों का चयन इस शर्त के आधार पर किया जायेगा कि (iii) के अलावा उपर्युक्त सभी वर्गों के परिवार गरीबी रेखा से नीचे हो ।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना- लाभार्थियों की भागीदारी

नवीन आवास का निर्माण लाभार्थी द्वारा स्वयं किया जावेगा। लाभार्थी निर्माण के लिए जरूरी निर्माण सामग्री की व्यवस्था स्वयं कर सकते है, अपने आप ही कुशल श्रमिकों को लगा सकते हैं तथा पारिवारिक श्रम का भी योगदान कर सकते हैं। लाभार्थियों को नवीन आवास के निर्माण के सम्बन्ध में पूरी स्वतंत्रता होगी, परन्तु आवास निर्माण पक्का होगा । लाभार्थियों के चाहने पर जिला परिषदें आवास निर्माण में तकनीकी मार्गदर्शन पंचायत समिति के अभियंताओं से दिलवायेगी।

(i) जिला परिषद की प्रशासनिक स्वीकृति के 15 दिवस में लाभार्थियों को फोटो सहित आवेदन पत्र (प्रपत्र 1 ) एवं बैंक / पोस्ट ऑफिस बचत खाते की पास बुक की फोटो प्रति एवं आवास स्थल की भूमि का पट्टा अथवा अन्य विवरण, ग्राम सेवक को जमा करवाकर प्राप्ति रसीद लेवें । नोट:- लाभार्थी को अपना बचत खाता यथा सम्भव बैंक में ही खुलवाना चाहिए ताकि खाते में जिला परिषद से राशि का हस्तान्तरण शीघ्र हो सके। जहाँ बैंक शाखा सुविधाजनक नहीं हो वहां लाभार्थी अपना खाता पोस्ट ऑफिस में भी ( महा-नरेगा के खाते से भिन्न) खुलवा सकता है, परन्तु जिला की राशि लाभार्थी के खाते में जमा होने की परिषद से राशि हस्तान्तरण में अधिक समय लगेगा।

(ii) जिला परिषद से वित्तीय स्वीकृति के साथ प्रथम किश्त तिथि से एक माह में नवीन आवास का निर्माण न्यूनतम 20 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रारम्भ कर रिपोर्ट ग्राम सेवक को देनी है तथा 3 माह में आवास का निर्माण लिंटल लेवल तक पूर्ण कर निर्माणाधीन आवास का फोटो एवं द्वितीय किश्त की मांग का आवेदन एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र ( प्रपत्र 3-4 ) में ग्राम सेवक को देकर प्राप्ति रसीद लेवें ।

(iii) जिला परिषद से द्वितीय किश्त की राशि लाभार्थी के खाते जमा होने की तिथि से तीन माह में छत, खिडकी एवं दरवाजों का कार्य पूर्ण कर, साईन बोर्ड सहित लाभार्थी एवं आवास का फोटो के साथ तृतीय किश्त की मांग का आवेदन एवं पूर्णता प्रमाण पत्र (प्रपत्र – 5 ) में ग्राम सेवक को देकर प्राप्ति रसीद लेवें।

आवास की छत, खिडकी, दरवाजे का कार्य पूर्ण करने के साथ-साथ लाभार्थी को मकान की दीवार पर मुख्य दरवाजे के दांयी अथवा बांयी ओर ऑयल पेन्ट से एक साईन बोर्ड 3 फुट X 3 फुट आकार का दिशा-निर्देशों के पैरा-56 में निर्धारित प्रारूप में बनवाना होगा ।

(iv) जिला परिषद से तृतीय किश्त की राशि लाभार्थी के खाते में जमा होने पर लाभार्थी को अपने आवास के प्लास्टर / पोइंटिग, आंगन, रंगाई-पुताई आदि (finishing) का कार्य शीघ्र कराना सुनिश्चित करना चाहिये ।

(v) आवास निर्माण में योजनार्न्तगत स्वीकृत अनुदान सहायता से अधिक होने वाले व्यय को लाभार्थी को स्वयं के संसाधनों से अपने स्तर पर वहन करना होगा।

(vi) नवीन आवास निर्माण के अलावा स्वच्छ शौचालय के निर्माण करने पर सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान” से अतिरिक्त अनुदान सहायता देय होगी।

(vii) योजना से सम्बन्धित किसी भी कठिनाई, शिकायत, जानकारी, सुझाव के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सेवक, पंचायत समिति स्तर पर विकास अधिकारी, जिला परिषद स्तर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जि.ग्रा.प्र.) एवं राज्य स्तर पर अधीक्षण अभियन्ता (ग्रामीण विकास), मुख्य लेखाधिकारी (पंचायती राज ), शासन सचिव, ग्रामीण विकास तथा शासन सचिव एवं आयुक्त पंचायती राज से सम्पर्क किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना -आवास का आबंटन

“मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना में आवासों की स्वीकृति लाभार्थी परिवार की महिला सदस्य के नाम होनी चाहिए। विकल्पतः इसे पति एवं पत्नि दोनों के नाम आवंटित किया जा सकता हैं। तथापि यदि परिवार में कोई पात्र महिला सदस्य उपलब्ध / जीवित नहीं है, तो आवास पात्र बीपीएल परिवार के पुरुष सदस्य को भी आवंटित किया जा सकता हैं। विकलांग की स्थिति में विकलांग व्यक्ति (पुरूष / महिला) के नाम से आवास स्वीकृत किया जाना चाहिए ।